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14 अप्रैल से फिर गूंजेंगी शहनाइयां, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का ‘अबूझ मुहूर्त’; जानें साल 2026 की सभी शुभ तिथियां

14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही शुभ कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त के साथ शादियों का सीजन शुरू होगा. जून तक विवाह के कुल 24 मुहूर्त रहेंगे.

हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर लगा एक महीने का विराम अब समाप्त होने जा रहा है. 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा, जिससे विवाह, गृह प्रवेश और नूतन निर्माण जैसे शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त होगा.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक और विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, 15 मार्च से मीन राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ शुरू हुआ खरमास 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ संपन्न होगा. इसके बाद 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के विशेष मुहूर्त के साथ शादियों का सीजन जोर-शोर से शुरू हो जाएगा.

19 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त और अक्षय तृतीया की महिमा

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं. जिन जोड़ों की शादी की तारीख पंचांग से नहीं निकल पाती, उनके लिए अक्षय तृतीया सबसे उत्तम विकल्प होता है.

चातुर्मास और अधिक मास का प्रभाव

इस वर्ष विवाह की तिथियों पर अधिक मास और चातुर्मास का भी प्रभाव रहेगा:

  • अधिक मास: 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहने के कारण विवाह कार्यों पर करीब एक महीने का ब्रेक रहेगा.
  • चातुर्मास: 25 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से 20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक भगवान विष्णु शयन काल में रहेंगे, इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा.

वर्ष 2026 के प्रमुख विवाह मुहूर्त

डा. अनीष व्यास के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2026 के बीच विवाह के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

महीना विवाह की शुभ तिथियां
अप्रैल 2026 19, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई 2026 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
जून 2026 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई 2026 1, 6, 7, 11
नवंबर 2026 21, 24, 25, 26
दिसंबर 2026 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12

( कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है. )

क्यों वर्जित थे मांगलिक कार्य?

ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि (मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे अपनी शक्ति खो देते हैं, जिसे ‘खरमास’ कहा जाता है. इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. अब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं और गुरु का बल भी बढ़ गया है, जिससे विवाह के बाद वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है.

विवाह का धार्मिक महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है. इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है. विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं. हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है. इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है.

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