कुंडली में विवाह योग का विश्लेषण सातवें भाव और शुक्र या गुरु की स्थिति पर निर्भर करता है. ज्योतिष के अनुसार, शादी होगी या नहीं या कब होगी, इसका राज कुंडली में छिपा होता है.
कुंडली में विवाह रहस्य
विवाह या वैवाहिक जीवन का संबंध कुंडली के सातवें भाव (7th House) से होता है. क्योंकि कुंडली का सातवां भाव मुख्य रूप से विवाह और जीवनसाथी का होता है. यदि इस भाव में शुक्र, बुध या बृहस्पति जैसे शुभ ग्रह बैठे हों, तो विवाह के प्रबल योग बनते हैं.
जन्म कुंडली के सातवें भाव के स्वामी (सप्तमेश) का केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में होने पर विवाह होने का सकारात्मक संकेत होता है.
पुरुषों के लिए शुक्र ग्रह (Venus) विवाह का कारक है. कुंडली में शुक्र ग्रह की मजबूत स्थिति से शीघ्र विवाह का योग बनता है.
वहीं महिलाओं के लिए बृहस्पति ग्रह को पति का कारक माना जाता है. गुरु का शुभ प्रभाव सुयोग्य वर और समय पर शादी का संकेत देता है.
कुंडली विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, जब गोचर में बृहस्पति सातवें भाव, सप्तमेश या लग्न पर दृष्टि डालता है, तो उस समय शादी की तय होने की संभावना सबसे अधिक होती है.
अधिकतर विवाह शुक्र या बृहस्पति की महादशा या अंतर्दशा के दौरान होते हैं. यदि सप्तमेश की दशा चल रही हो, तो भी विवाह के द्वार खुलते हैं.





