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साल 2020 में भिलाई के तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी के तिहरे हत्याकांड में दोषी पाए जाने पर रवि शर्मा को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।

भिलाई। दुर्ग जिले के भिलाई से एक बड़ी खबर सामने आई है। तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी के बी ब्लॉक के पारिजात अपार्टमेंट्स में साल 2020 में हुई सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड के आरोपी रवि शर्मा को अदालत ने बुधवार को फांसी की सजा सुनाई है। शहरवासी इस फैसले को दरिंदगी के खिलाफ कड़ा संदेश मान रहे हैं। फैसला आते वक्त कोर्ट में मौजूद मृतकों के परिजनों की आंखें छलक पड़ीं।

थ्रिलर फिल्म की तरह वारदात से सन्न रह गया था शहर 
उल्लेखनीय है कि, इस वारदात की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म की तरह है। 21 जनवरी 2020 की सुबह करीब 5.35 बजे भिलाई के सेक्टर क्षेत्र स्थित तालपुरी में रहने वाली कला सूर्यवंशी के मोबाइल पर एक कॉल आई। दूसरी तरफ से आवाज आई – तुम्हारे बेटी‑दामाद अपने मकान में जल रहे हैं, बचा सको तो बचा लो.. यह कहकर फोन काट दिया गया।

अचानक इस कॉल से घबराई कला सूर्यवंशी ने तुरंत अपने बेटे और परिचितों को तालपुरी पारिजात कॉलोनी स्थित फ्लैट नंबर 20‑N में रहने वाली बेटी मंजू शर्मा के पास भेजा। जब रिश्तेदार वहां पहुंचे तो फ्लैट के बाहर से ताला लगा हुआ था, लेकिन अंदर से धुआं निकल रहा था। अनहोनी की आशंका में पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। कमरे के अंदर घना धुआं भरा था, चारों तरफ जलने की तीखी बदबू फैली हुई थी।

बिस्तर पर मिली मंजू की अधजली लाश, कमरे में थे दो और शव 
सोने बेडरूम में बिस्तर पर मंजू शर्मा की अधजली लाश पड़ी मिली। उसके मुंह, हाथ और पैरों को कार्टून पैक करने वाले चौड़े टेप से कसकर बांधा गया था। बगल में ही उसकी डेढ़ महीने की मासूम बच्ची की जली हुई लाश पड़ी थी। दोनों की स्थिति देखकर साफ था कि, पहले उन्हें बंधक बनाकर बिस्तर से बांधा गया और उसके बाद उन्हें मौत के हवाले किया गया।

कमरे के एक कोने में फर्श पर एक तीसरी अधजली लाश भी मिली, जो एक युवक की थी। चेहरा बुरी तरह से झुलसा होने के कारण उसकी शिनाख्त मौके पर नहीं हो सकी। शुरुआती तौर पर यह मामला गैस रिसाव या सिलिंडर ब्लास्ट से हुई दुर्घटना जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी, मगर मौके की स्थिति और शवों की हालत ने पुलिस को शुरू से ही किसी बड़ी साजिश का संदेह दे दिया।

फोन काल ने खोद दी पोल

सूचना पर पहुंची पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। फ्लैट के अंदर घरेलू गैस की तेज बदबू थी, सिलिंडर की स्थिति और बर्न पैटर्न से यह स्पष्ट हुआ कि, गैस छोड़कर धमाका कराने और आग से पूरे सबूत मिटाने की तैयारी की गई थी। जांच में सामने आया कि पहले तीनों की गला दबाकर हत्या की गई, उसके बाद उनके शरीरों पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाई गई, ताकि मामला महज हादसा लगे और असली कहानी हमेशा के लिए राख में बदल जाए।

मामला उलझा हुआ जरूर था, लेकिन पुलिस ने सबसे पहले उसी मोबाइल नंबर को ट्रेस किया, जिससे कला सूर्यवंशी को “तुम्हारे बेटी‑दामाद जल रहे..” वाला कॉल किया गया था। कॉल डिटेल्स से पता चला कि यह मोबाइल मंजू के पति/लिव‑इन पार्टनर रवि शर्मा के पास था, जो घटना के बाद से गायब था।

तुरंत शहर छोड़कर भागा आरोपी
तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और यात्रा संबंधी रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि वारदात के तुरंत बाद रवि शहर छोड़कर भाग चुका है। लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने रेलवे और अन्य एजेंसियों को अलर्ट किया और कुछ ही समय में उसे राउरकेला की ओर जा रही ट्रेन से पकड़ लिया गया। पूछताछ में जो कहानी निकली, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए।

रवि शर्मा पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी व बच्चे दूसरे शहर में रहते थे। मंजू से उसने अपना पुराना वैवाहिक जीवन पूरी तरह छिपाकर रिश्ता बनाया और बाद में लिव‑इन जैसी स्थिति में उसके साथ रहने लगा।

बनाया खौफनाक प्लान

समय के साथ जब मंजू गर्भवती हुई और बच्ची का जन्म हुआ, जिम्मेदारियां बढ़ीं। उधर रवि अपने पुराने घर‑परिवार के पास लौटना चाहता था, लेकिन उसे डर था कि दूसरी शादी/रिश्ते की सच्चाई सामने आने पर वह कानूनी गिरफ्त और सामाजिक बदनामी से नहीं बच सकेगा। इसी से उसने एक खौफनाक प्लान बनाया – खुद को ही मरा हुआ दिखा देना। इसी योजना के तहत वह एक मानसिक रूप से अस्वस्थ और असहाय युवक को अपने जाल में फंसाकर फ्लैट तक लाया।

आरोप है कि, पहले उसी युवक की गला दबाकर हत्या की गई, ताकि बाद में उसकी जली हुई लाश को अपनी लाश बताकर पहचान करवाई जा सके। इसके बाद मंजू और डेढ़ माह की बच्ची को भी बेरहमी से मार डाला गया। तीनों शवों पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाई गई और गैस सिलिंडर खोलकर पूरा फ्लैट उड़ाने की साजिश रची गई।

पुलिस को गुमराह करने दीवार पर धमकीभरा मैसेज लिखा
घटनास्थल की दीवार पर बड़ा सा धमकी भरा संदेश भी लिखा मिला, जिसमें किसी तीसरे व्यक्ति का नाम घसीटते हुए दो और बहनों को मारने जैसी बात लिखी हुई थी। इसका मकसद पुलिस की जांच को झूठी दिशा में मोड़ना और पूरे मामले को किसी कथित प्रेम‑प्रसंग की दुश्मनी जैसा दिखाना था।

लेकिन कॉल डिटेल्स, लोकेशन, ट्रेन टिकट, रवि के विरोधाभासी बयान और वैज्ञानिक सबूतों ने दीवार पर लिखी इस कहानी की परतें जल्द ही खोल दीं। जांच एजेंसियों ने तीसरे मृतक युवक की पहचान, उसकी मानसिक स्थिति और रवि के उससे संपर्क को जोड़कर साफ कर दिया कि वह महज “डमी” बनाकर हत्या की साजिश का हिस्सा बनाया गया था।

कोर्ट ने रेयर आफ रेयरेस्ट केस माना

अदालत ने भी माना कि, आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से दोहरी जिंदगी जीते हुए न सिर्फ पत्नी और बच्ची का विश्वास तोड़ा, बल्कि एक निर्दोष, कमजोर और असहाय युवक को भी अपनी साजिश का शिकार बना लिया। सबूतों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने इसे ‘रेयर ऑफ रेयरेस्ट’ श्रेणी का अपराध मानते हुए रवि शर्मा को मौत की सजा (मृत्युदंड) सुनाई। साथ ही अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी हैवानियत पर कठोरतम दंड ही समाज में न्याय और प्रतिरोध का संदेश दे सकता है।

परिजनों ने कहा – देर से सही, लेकिन न्याय मिला 
फैसला सुनते ही कोर्ट में मौजूद मंजू की मां कला सूर्यवंशी और अन्य परिजन भावुक हो उठे। बाहर निकलते ही कला बाई ने कहा, मेरी बेटी और नातिन को हमने वापस नहीं पाया, लेकिन कम से कम कानून ने ये मान लिया कि उनकी जान की कोई कीमत थी। हमने शुरू से ही बस यही कहा था कि इस कत्ल के पीछे वही आदमी है, जिसने उन्हें घर का सुरक्षा कवच देने का वादा किया था।

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