बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राजनांदगांव जिले के एक चर्चित कथित शादी और धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए महिला द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, आरोपी द्वारा महिला को कानूनी रूप से पत्नी होने का झांसा देकर साथ रहने के लिए प्रेरित करने (धारा 493 IPC) का आरोप साबित नहीं होता, क्योंकि महिला को पहले से ही जानकारी थी कि आरोपी पहले से शादीशुदा है।
शिकायत और नोटिस में शादी के स्पष्ट प्रमाण नहीं
दरअसल, मामले में महिला मंती साहू ने आरोप लगाया था कि 2008 में उसकी शादी महेश गंजीर से हुई और बाद में दोनों पति-पत्नी की तरह रहे, लेकिन पैसे की मांग पूरी नहीं करने पर आरोपी ने उसे घर से निकाल दिया। हालांकि कोर्ट ने पाया कि, शिकायत और नोटिस में शादी के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं, बल्कि यह उल्लेख है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाए।
एकरारनामा के आधार पर शादी का दावा
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि, जिस एकरारनामा के आधार पर महिला शादी का दावा कर रही थी, उसे पहले ही सिविल कोर्ट और बाद में हाईकोर्ट द्वारा अवैध घोषित किया जा चुका है, क्योंकि आरोपी पहले से विवाहित था। ऐसे में धोखे से शादी का विश्वास दिलाने का आवश्यक तत्व ही साबित नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने अपील को किया निरस्त
कोर्ट ने कहा कि, धारा 493 के तहत अपराध तभी बनता है जब महिला को झूठा विश्वास दिलाया जाए कि वह कानूनी रूप से पत्नी है, जबकि इस मामले में महिला स्वयं आरोपी की पहली पत्नी के बारे में जानती थी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया।



