विप्रो अक्सर बाजार भाव से प्रीमियम पर शेयर बायबैक करता है, जो निवेशकों को तुरंत लाभ कमाने का मौका देता है. सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, बायबैक में 15 फीसदी हिस्सा छोटे निवेशकों के लिए आरक्षित होता है, जिससे उनके शेयरों के स्वीकार होने की संभावना बढ़ जाती है.
IT सर्विस की बड़ी कंपनी विप्रो ने 15,000 करोड़ रुपए के शेयर बायबैक की घोषणा की है. जिसमें हर शेयर की कीमत 250 रुपए तय की गई है. ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे इस बायबैक में हिस्सा लेने के लिए कंपनी के शेयर खरीदें, और इसके लिए कई वजहें बताई हैं. बायबैक की यह कीमत NSE पर शेयर की पिछली क्लोजिंग कीमत (199.36 रुपए प्रति शेयर) से 25 फीसदी से भी ज्यादा प्रीमियम पर है. लगभग तीन साल में Wipro की यह पहली बायबैक घोषणा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर विप्रो मार्केट से कितने शेयर वापस खरीद रहा है. साथ ही इस पर जानकारों की ओर से निवेशकों को किस तरह की सलाह दी है.
कितने शेयर वापस लेने की प्लानिंग
Wipro के बोर्ड ने 60 करोड़ तक शेयर वापस खरीदने की योजना को मंजूरी दे दी है. ये शेयर कंपनी की कुल पेड-अप शेयर कैपिटल का 5.7 फीसदी हैं, और इनके लिए कुल 15,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम खर्च की जाएगी. यह बायबैक ‘टेंडर रूट’ के जरिए किया जाएगा. रिकॉर्ड डेट पर मौजूद सभी शेयरहोल्डर-जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें अपने अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADR) कैंसल करने के बाद इक्विटी शेयर मिले हैं-इस कॉर्पोरेट एक्शन में हिस्सा लेने के हकदार होंगे. Wipro ने बताया कि प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप ने इस प्रस्तावित बायबैक में हिस्सा लेने की अपनी मंशा जाहिर की है. शेयरहोल्डर्स की पात्रता, शेयरों की स्वीकार्यता का रेश्यो (acceptance ratio) और अन्य डिटेल तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट की घोषणा अभी बाकी है.
Wipro बायबैक पर जानकारों की राय?
Wipro के पिछले बायबैक ट्रेंड्स और रिटेल शेयरहोल्डिंग के अपेक्षाकृत कम पैटर्न को ध्यान में रखते हुए, HDFC Securities ने निवेश के दो संभावित सिनेरियो सामने रखे हैं. ‘कंजर्वेटिव’ (रूढ़िवादी) सिनेरियो में, इस घरेलू ब्रोकरेज फर्म ने पिछले ऑफर की तुलना में एक्सेप्टेंस रेश्यो को थोड़ा कम—यानी लगभग 45-50 फीसदी—माना है. फर्म ने कहा कि यह रिटेल निवेशकों के लिए एक शानदार शॉर्ट टर्म अवसर है, जिससे उन्हें 2-3 महीनों की अवधि में 8-9 फीसदी (शुद्ध) का संभावित रिटर्न मिल सकता है.
‘अग्रेसिव’ सिनेरियो में, HDFC Securities ने कहा कि रिटेल शेयरों की एक्सेप्टेंस रेश्यो 70-80% के बीच रहने का अनुमान लगाने के लिए एक मजबूत मात्रात्मक आधार मौजूद है (2023 में यह अनुपात 78 फीसदी था). फर्म ने आगे कहा कि यह रिटेल निवेशकों के लिए एक अल्पकालिक अवसर है, जिससे उन्हें 2-3 महीनों की अवधि में 13-14 फीसदी (शुद्ध) का संभावित रिटर्न मिल सकता है. बेहतरीन प्रदर्शन के इस ट्रैक रिकॉर्ड और मौजूदा बाजार की अस्थिरता के बीच स्थिर रिटर्न की संभावना को देखते हुए, एक्सेप्टेंस रेशियो (स्वीकृति अनुपात) काफी ज्यादा रहने की उम्मीद है. इसलिए, हम उन रिटेल निवेशकों के लिए एक रणनीतिक ‘खरीद’ (Buy) की सलाह देते हैं, जो आने वाले ऑफर में हिस्सा लेकर अपने शॉर्ट-टर्म कैपिटल एलोकेशन को बेहतर बनाना चाहते हैं.
वहीं, मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेज्मेंट ने कहा कि जो रिटेल निवेशक शॉर्ट-टर्म मौकों की तलाश में हैं, वे विप्रो के शेयर खरीद सकते हैं. Wipro के पिछले दो बायबैक और रिटेल शेयरहोल्डिंग के बहुत कम होने के बेस पर, हमें उम्मीद है कि एक्सेप्टेंस रेशियो 50-60 फीसदी की सीमा में ज्यादा रहेगा, जिससे 2-3 महीने के समय में 11-13 फीसदी (टैक्स से पहले) का संभावित रिटर्न मिल सकता है.





