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अक्षय तृतीया पर दान क्यों है खास? जानें पौराणिक कथाओं में छिपा रहस्य

अक्षय तृतीया के दिन दान करने का विशेष महत्व है. इस दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है. आइए, एक कथा के माध्यम से इसके पीछे का रहस्य जानते हैं.

अक्षय तृतीया को ‘आखा तीज’ के नाम से भी जाना जाता है. ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है- जिसका कभी नाश न हो. हिंदू धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता है. साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन लोग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. साथ ही, इस दिन खरीदारी करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान जन्म-जन्मांतर तक फल देता है.

पौराणिक कथा

धर्मदास की श्रद्धा

प्राचीन समय में धर्मदास नाम का एक वैश्य (व्यापारी) रहता था. वह बहुत गरीब था और हमेशा अपने बड़े परिवार के पालन-पोषण को लेकर चिंतित रहता था. गरीब होने के बावजूद उसका मन बहुत साफ था और देवताओं व ब्राह्मणों के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा थी.

अक्षय तृतीया का संकल्प

एक बार धर्मदास ने अक्षय तृतीया के व्रत का महत्व सुना. जब यह पर्व आया, तो उसने सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान किया. देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा की और अपनी क्षमता के अनुसार दान सामग्री का प्रबंध किया. उसने ब्राह्मणों को जल से भरे घड़े, पंखे, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गुड़, घी और वस्त्र जैसी चीजों का दान किया.

परिवार का विरोध और अटूट विश्वास

धर्मदास की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उसकी पत्नी और परिवार वालों ने उसे इतना सारा दान करने से रोका. उन्हें डर था कि अगर सब कुछ दान कर दिया, तो घर का खर्च कैसे चलेगा. लेकिन धर्मदास पीछे नहीं हटे. उसने हर साल पूरी श्रद्धा के साथ अक्षय तृतीया पर दान और पुण्य का कार्य करना जारी रखा.

भक्ति का फल

समय बीतता गया. धर्मदास बूढ़ा और बीमार भी हो गया, लेकिन उसकी भक्ति कम नहीं हुई. अपनी इसी निस्वार्थ श्रद्धा के कारण वह अगले जन्म में कुशावती नगर का एक बहुत ही भाग्यशाली और प्रतापी राजा बना. वह इतना वैभवशाली था कि स्वयं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) ब्राह्मण का रूप धारण कर उसके यज्ञ में शामिल होने आते थे.

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