राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम बाबा का प्राचीन मंदिर, जिन्हें भक्त हारे का सहारा भी कहते हैं. आपने कभी खाटू श्याम में 13 सीढ़ियों का महत्व समझा है? जानिए इसका महत्व?
खाटू श्याम 13 सीढ़ियाँ का रहस्य
राजस्थान के सीकर जिले में खाटूश्याम में बाबा श्याम का प्राचीन मंदिर स्थित है.धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय इतिहास के मुताबिक, राजा रूप सिंह चौहान और उनकी धर्मपत्नी नर्मदा कंवर ने ई. 1027 में इस मंदिर का निर्माण कराया था. तभी से चौहान वंशज इस मंदिर की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं और आज भी वे मंदिर ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक हैं.
बाबा खाटूश्याम को भक्त अपनी सहुलियित अनुसार कई नामों से पुकारते हैं. कोई उन्हें हारे का सहारा कहता है, तो कोई तीन बाणधारी या खाटू नरेश के नाम से पुकारता है. भक्तों का मानना है कि, बाबा श्याम अपने भक्तों की सभी समस्याओं का निवारण करने के साथ उनकी संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
खाटू श्याम दर्शन करने आने वाले भक्त उनके दर्शन करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को ही 13 सीढ़ियों का महत्व पता है? आखिर ये 13 सीढ़ियों का रहस्य क्या है, जिसके बारे में कई श्याम प्रेमी भी नहीं जानते हैं?
दरअसल सन 1087 ई. में जब मंदिर का निर्माण हुआ था, तब मुख्य द्वार से गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 13 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं. यह एकमात्र मार्ग था जिससे भक्त खाटू श्याम बाबा के दर्शन करते थे. समय के साथ जब भीड़ बढ़ी, तो श्री श्याम मंदिर कमेटी ने जिला प्रशासन की सहायता से 14 नई नई लाइनों की व्यवस्था की, लेकिन आज भी चार लाइनें वही पुराना मार्ग हैं, जिनसे भक्त 13 सीढ़ियों को चढ़कर बाबा के दर्शन करते हैं.
भक्तों का मानना है कि, 13 सीढ़ियों को चढ़कर दर्शन करने से बाबा श्याम से सीधा संपर्क होता है, जिससे वे दुख-दर्द कह सकते हैं और बाबा तुरंत राहत देते हैं. हालांकि मंदिर कमेटी का कहना है कि, यह मात्र भक्तों की अवधारणा है, बाबा श्याम सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं, चाहे कोई भी द्वार या मार्ग क्यों न हो.





