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मृत्यु के बाद 49 दिनों तक कहां रहती है आत्मा, क्या कहती है ‘तिब्बती बुक ऑफ द डेड’, क्यों 3 दिनों तक नहीं छूते शव

तिब्बती बौद्ध धर्म का एक खास ग्रंथ बताता है कि मृत्यु के बाद हमारा क्या होता है आत्मा कहां कितने दिनों तक रहती है.

ये बात हमेशा से कौतुहल की रही है कि मृत्यु के बाद आखिर होता क्या है. आत्मा का क्या होता है. ये कहां जाती है. कहां रहती है. यानि मृत्यु के बाद आत्मा किस तरह एक रहस्यपूर्ण यात्रा करती है. तिब्बती बौद्ध धर्म की किताब तिब्बती बुक ऑफ डेड में इसके बारे में बहुत विस्तार से लिखा है. आत्मा की इस यात्रा को तिब्बती बौद्ध धर्म में बार्डो थोदोल कहते हैं.

तिब्बती बुक ऑफ द डेड के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा 49 दिनों तक बार्डो में भटकती है. फिर अपने कर्मों के अनुसार नया जन्म लेती है.

मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है, ये सवाल आज से नहीं सदियों से कौतुहल और रहस्य बना हुआ है. तिब्बती बौद्ध धर्म में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है. इसे “बार्डो थोदोल” (तिब्बती बुक ऑफ द डेड) के नाम से जाना जाता है. ये ग्रंथ है जो मृत्यु के बाद की यात्रा का वर्णन करता है. तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुसार मृत्यु के बाद बहुत कुछ होता है. आत्मा को तमाम चरणों से गुजरना होता है. इसके बाद ही उसका अगला जन्म भी तय होता है.

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