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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 24 घंटे घर बैठे मिलेगा टोकन, किसान एप से करें आवेदन

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 24 घंटे घर बैठे मिलेगा टोकन, किसान एप से करें आवेदन

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी (Dhan Kharidhi) की शुरुआत 15 नवंबर से होने जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान बेचने वाले किसानों को इस बार टोकन प्राप्त करने के लिए नए नियमों का पालन करना होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने टोकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप (Tuhar Token App) के माध्यम से आवेदन की सुविधा दी है। किसान घर बैठे 24 घंटे इस एप के जरिए टोकन प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने किसानों के भूमि रकबे के आधार पर टोकन की संख्या निर्धारित की है। इसके तहत दो एकड़ तक भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों को एक टोकन मिलेगा।

10 से जारी होगा धान बिक्री के लिए टोकन

खरीदी के लिए खाद्य विभाग ने ‘तुहर टोकन’ मोबाइल एप की सुविधा शुरू की है। किसान गूगल प्ले स्टोर से एप डाउनलोड कर ओटीपी आधारित पंजीयन करा सकेंगे। 10 नवंबर से टोकन मिलना शुरू होगा। समिति में प्रतिदिन निर्धारित खरीदी सीमा का 70 प्रतिशत टोकन एप से और 30 प्रतिशत समिति के माध्यम से जारी होगा। एप में 80 प्रतिशत आरक्षण लघु एवं सीमांत किसानों तथा 20 प्रतिशत दीर्घ किसानों के लिए रहेगा। किसान अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान की मात्रा दर्ज कर सकेंगे।

समर्थन मूल्य पर खरीदी

नई व्यवस्था में किसान की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित ओटीपी सत्यापन अनिवार्य किया गया है। मोबाइल एप में पंजीयन और टोकन प्रक्रिया के दौरान किसान की पहचान का सत्यापन आधार ओटीपी के माध्यम से होगा। इसका उद्देश्य फर्जी पंजीयन और अनियमितताओं पर रोक लगाना है। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे धान खरीदी शुरू होने से पहले अपने मोबाइल में तुंहर टोकन एप की सुविधा और पंजीयन संबंधी जानकारी सुनिश्चित कर लें। मोबाइल नंबर और आधार से संबंधित जानकारी भी अद्यतन रखें, ताकि टोकन प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी न हो।

हेल्पलाइन नंबर हुआ जारी

टोकन व्यवस्था या एप से संबंधित तकनीकी समस्या आने पर किसान खाद्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समितियों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

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