अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी के अनुसार, यूएई का ओपेक छोड़ना भारत जैसे बड़े तेल इंपोर्टर देश के लिए पॉजिटिव हो सकता है. यूएई के बाहर होने से प्रोडक्शन कैप्स में ढील मिल सकती है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें स्थिर हो सकती हैं. भारत और यूएई के बीच पहले से ही मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं. ओपेक के बिना यूएई सीधे तौर पर भारत के साथ अधिक लचीली तेल डील कर सकेगा.
अडानी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी ने बुधवार को कहा कि UAE का OPEC या OPEC+ से हटने का कोई भी संभावित कदम भारत के लिए “पूरी तरह से फायदेमंद” हो सकता है, और उन्होंने आर्थिक मजबूती बनाने में ऊर्जा की अहम भूमिका पर जोर दिया. नई दिल्ली में ‘द इकोनॉमिस्ट इम्पैक्ट रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट’ के दौरान बोलते हुए, अडानी ने कहा कि ऐसे कदम के ग्लोबल असर अभी अनिश्चित हैं. उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि क्या इससे दुनिया के एनर्जी मार्केट्स में उथल-पुथल मचेगी या स्थिरता आएगी, और साथ ही यह भी जोड़ा कि UAE के साथ भारत के मजबूत जियो पॉलिटिकल संबंध उसके पक्ष में काम कर सकते हैं.
अडानी ने मजबूती को एनर्जी से जोड़ा
भारत की ऊर्जा चुनौतियों पर रोशनी डालते हुए अडानी ने एक बयान में कहा कि आज की दुनिया में मजबूती की परिभाषा तेजी से भरोसेमंद और किफायती एनर्जी तक पहुंच से तय हो रही है. उन्होंने कहा कि इस सदी में, ऊर्जा तक पहुंच ही मजबूती को परिभाषित करेगी, और इस बात की ओर इशारा किया कि कैसे संघर्षों से लेकर बाजार के झटकों तक की रुकावटें दुनिया की सभी इकोनॉमीज पर दूरगामी असर डाल सकती हैं. उन्होंने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत ग्लोबल एवरेज से काफी कम है, और उन्होंने ऊर्जा क्षमता के ढांचागत विस्तार की जरूरत पर जोर दिया. उनके अनुसार, भारत को अपने ग्रोथ टारगेट्स को पूरा करने के लिए, साथ ही किफायत और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावॉट ऊर्जा क्षमता जोड़ने की जरूरत पड़ सकती है.
किस बात पर दिया जोर?
अडानी ने ऊर्जा के लिए एक डायवर्सिफाइड “पोर्टफोलियो अप्रोच” अपनाने का आह्वान किया, जिसमें स्थिर बेसलोड बिजली सुनिश्चित करने के लिए रिन्युएबल, हाइड्रो, थर्मल और न्यूक्लियर सोर्स को एक साथ मिलाया जाए. उन्होंने लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रीफिकेशन और इंपोर्टेड एनर्जी पर निर्भरता कम करने के महत्व पर भी जोर दिया. अडानी ग्रुप की भूमिका का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि यह ग्रुप भारत की एनर्जी रीढ़ बनाने की एक इंटीग्रेटिड रणनीति के तहत रिन्युएबल एनर्जी, स्टोरेज, ट्रांजिशन और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्रों में निवेश कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में पॉलिसी कंटीन्यूटी और इंफ्रा डेवलपमेंट के ग्रोथ ने ऊर्जा निवेश को बढ़ाने के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार किया है, जो भारत के ग्रोथ और मजबूती को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी होगा.





