जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर वन मण्डल के माचकोट परिक्षेत्र में वन भूमि के विखंडन और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध विभाग ने प्रभावी कार्यवाही की है। वन अपराध प्रकरण में सोमवार को सुकमा जिले से आए 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय जगदलपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
वन अपराध में पकड़े गए 9 आरोपी
इनमें से 6 आरोपी पूर्व में भी अन्य वन अपराध प्रकरणों में न्यायिक अभिरक्षा के लिए जेल भेजे जा चुके हैं, ये आदतन अपराधी हैं जो वन क्षेत्र को लगातार नुकसान पहुंचा रहें हैं। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है।
11 आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल
न्यायालय के आदेशानुसार, सभी 11 आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल जगदलपुर दाखिल कराया गया है। उप वन मण्डलाधिकारी योगेश कुमार रात्रे ने बताया कि वन संपदा की सुरक्षा हेतु निरंतर गश्त एवं निगरानी की जा रही है। आरोपियों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी बल दिया जा रहा है।
वन अपराधियों पर कसा शिकंजा
यह कार्यवाही माचकोट के परिक्षेत्र अधिकारी सुमीत साहा के नेतृत्व में संपादित की गई, जिसमें परिक्षेत्र सहायक बन सिंह कर्मा, बुधसन बघेल, परिसर रक्षक घासीराम बघेल, अरविंद कोर्राम, रमेश कुमार बघेल, मोहन कुमार भारती, राजाराम कश्यप, मोहन कुमार भारती एवं वन प्रबन्धन समिति माचकोट के सुरक्षा श्रमिक शामिल रहे।
सतर्कता से रोका अतिक्रमण
वन विभाग जगदलपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी ने बताया कि वनों का संरक्षण एवं सुरक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मैदानी अमले की सतर्कता से इस अतिक्रमण को समय रहते रोका गया है। वन अपराधों पर नियंत्रण हेतु विभाग पूर्णत: सजग है।
जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही
बस्तर के वन मण्डलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार वन भूमि पर अवैध कब्जे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप संज्ञेय अपराध है और भविष्य में भी ऐसी सख्त वैधानिक कार्यवाही जारी रहेगी।





