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तेल की कीमतों में लगी आग, ट्रंप और ईरान की जिद ने बढ़ाई टेंशन

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकाबंदी से दुनिया भर में तेल का संकट पैदा हो गया है. ट्रंप के कड़े रुख और ईरान की जिद ने ग्लोबल इकोनॉमी को बड़े खतरे में डाल दिया है.

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद अब पूरी दुनिया पर इसका बुरा असर दिखने लगा है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल सप्लाई लाइन, यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, फिलहाल पूरी तरह बंद है. इसकी वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 107.66 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में आपकी जेब पर बोझ बढ़ना तय है.

क्यों बंद हुआ ये तेल का रास्ता?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज कोई आम रास्ता नहीं है; यहां से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है. शांति की उम्मीदें तब टूट गईं जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अफसरों को पाकिस्तान भेजने से मना कर दिया, जो इस झगड़े को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे. दूसरी तरफ, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कह दिया है कि धमकियों के बीच बातचीत नहीं होगी. नतीजा यह है कि दोनों देशों की सेनाओं ने यहां नाकाबंदी कर रखी है, जिससे जहाजों की आवाजाही लगभग जीरो हो गई है.

सप्लाई रुकने से आम आदमी पर क्या असर होगा?

यह संकट अब सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहा. हॉर्मुज का रास्ता बंद होने से अब गैस (LPG), नेचुरल गैस और खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद (Fertilizer) की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. भारत जैसे देशों में रसोई गैस की कमी महसूस की जाने लगी है. यही नहीं, विमानों का फ्यूल महंगा होने की वजह से कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं. जानकारों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई में 10% की बड़ी गिरावट आई है, जो आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती है.

क्या चीन और भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी?

अमेरिका इस समय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए नाकाबंदी को और सख्त कर रहा है. अमेरिकी सेना उन जहाजों को रोक रही है जो ईरानी तेल लेकर जा रहे हैं. खास तौर पर चीन की उन रिफाइनरियों पर नजर रखी जा रही है जो ईरान से सस्ता तेल खरीद रही थीं. आईईए (International Energy Agency) ने चेतावनी दी है कि यह इतिहास का सबसे बड़ा ‘सप्लाई शॉक’ हो सकता है. अगर यह गतिरोध नहीं सुलझा, तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

क्या है आगे का रास्ता?

फिलहाल पिछले नौ हफ्तों से चल रहे इस टकराव का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है. जब तक अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आते, तब तक तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद कम है. सप्लाई चेन टूटने से सिर्फ फ्यूल ही नहीं, बल्कि हर वह चीज महंगी हो सकती है जो ट्रांसपोर्ट से जुड़ी है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई दूसरा देश इस मामले को सुलझाने के लिए बीच-बचाव कर पाएगा या फिर दुनिया को इस बड़े आर्थिक संकट के लिए तैयार रहना होगा.

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