सुकमा। तीन दशक से भी ज्यादा समय तक नक्सल दंश झेल चुके जगरगुंडा में अब मांदर व ढोल बाजे और नगाड़े की धुन सुनाई देती है। आलम यह है कि दर्जन ग्रामों के हजारों ग्रामीणों का हुजूम दशकों बाद मेले में शामिल होकर देवी की पूजा अर्चना बीहड़ कहे जाने वाले दो की।
तीन दिवसीय आयोजित इस मेले में आसपास के 23 पंचायतों के 54 गांवों से सिरहा, पुजारी, गायता और पेन तलापत्ति सहित हजारों ग्रामीण शामिल हुए। दूर-दराज से जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों का जमावड़ा लगा, जिससे जगरगुंडा में रौनक देखते ही बन रही थी। स्थानीय बाजारों में लगी दुकानों पर ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की।
तीन दशकों के बाद दिखा बदलाव
ग्रामीणों और मेला समिति के अनुसार यह मेला पहले 12 वर्षों में एक बार आयोजित होता था, लेकिन लंबी अवधि को देखते हुए अब इसे हर 3 वर्षों में आयोजित किया जा रहा है। सलवा जुडूम के दौर के बाद यह मेला पूरी तरह बंद हो गया था।
जब दीपिका हुई मेले में शामिल
मेले में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी ने दिनभर उपस्थित रहकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ समय बिताया। उन्होंने मेला समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पारंपरिक रस्मों में भाग लिया। माँ दारेलम्मा के स्वागत-वंदन, पेद्दापंडुम मंडपम और देवी-देवताओं के मिलन समारोह में शामिल होकर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति को नमन किया।
अभूतपूर्व उत्साह
सुरक्षा व्यवस्था की कमान सम्भाल रहे जगरगुंडा के एसडीओपी तोमेश वर्मा ने बताया कि इस बार मेले की धमक कुछ अलग ही उत्साह बयां कर रही थी। सुरक्षा को लेकर भी पुलिस की ओर से सारी तैयारी के बीच सहायता केंद्र भी खोले गए थे।





