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इस बैंक के ग्राहक अपने ही अकाउंट से नहीं निकाल पाएंगे पैसा, RBI ने रद्द किया लाइसेंस

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय अनियमितताओं और पर्याप्त पूंजी के अभाव के चलते शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र स्थित शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है. केंद्रीय बैंक की यह कार्रवाई सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से की गई है.

आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है. बैंक ने सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को कारोबार की समाप्ति के साथ ही अपनी सभी बैंकिंग सेवाएं बंद कर दी हैं.

बैंकिंग सेवाओं पर लगी रोक

इसका मतलब यह है कि अब यह बैंक न तो ग्राहकों से नई जमा राशि स्वीकार कर सकेगा और न ही किसी प्रकार के ऋण या भुगतान का लेन-देन कर पाएगा. इसके साथ ही, आरबीआई ने सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के पंजीयक से बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू करने और एक परिसमापक नियुक्त करने का औपचारिक अनुरोध भी किया है.

क्यों लिया गया इतना सख्त फैसला?

आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस रद्द करने के पीछे ठोस वित्तीय कारणों का हवाला दिया है. केंद्रीय बैंक की जांच में सामने आया कि बैंक के पास अपना कारोबार चलाने के लिए न्यूनतम आवश्यक पूंजी का भारी अभाव है.

कमाई की संभावना नहीं

बैंक की वर्तमान वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वह भविष्य में लाभ कमा सके या खुद को पुनर्जीवित कर सके. अपनी जर्जर आर्थिक स्थिति के कारण, बैंक अपने वर्तमान जमाकर्ताओं की पूरी राशि वापस करने की स्थिति में नहीं रह गया था.

जनहित में फैसला

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक को कामकाज जारी रखने की अनुमति दी जाती, तो यह जमाकर्ताओं और सार्वजनिक हितों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता.

किसे और कितना मिलेगा रिफंड?

लाइसेंस रद्द होने की खबर के बाद खाताधारकों के मन में अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है. हालांकि, आरबीआई ने इस पर राहत भरी जानकारी दी है.

परिसमापन की प्रक्रिया के तहत, प्रत्येक जमाकर्ता जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार क्लेम करने का हकदार है. इसके तहत, प्रत्येक खाताधारक को उसकी जमा राशि (बचत, चालू, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि) पर अधिकतम 5,00,000 रुपये (5 लाख रुपये) तक का बीमा कवर मिलता है.

बैंक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि लगभग 99.7 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं, जिनकी पूरी जमा राशि इस 5 लाख रुपये की सीमा के भीतर आती है. इसका मतलब है कि लगभग सभी छोटे और मध्यम जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा वापस मिल जाएगा। केंद्रीय बैंक ने यह भी सूचित किया कि डीआईसीजीसी ने 31 जनवरी, 2026 तक पात्र जमाकर्ताओं को पहले ही 48.95 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है.

आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

अब जबकि लाइसेंस रद्द हो चुका है, नियुक्त किया गया परिसमापक बैंक की संपत्तियों की गणना करेगा और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से देनदारियों का निपटान करेगा. जिन ग्राहकों की जमा राशि 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें शेष राशि के लिए परिसमापन प्रक्रिया के अंत तक प्रतीक्षा करनी होगी, जो बैंक की संपत्तियों की वसूली पर निर्भर करेगा.

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