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लंका दहन से लेकर लक्ष्मण की नींद तक रामायण से जुड़े 6 ऐसी बातें, जिनके पीछे का सच हैरान कर देगा!

महर्षि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य की रचना की थी. सादियों से रामायण भारतीय महाकाव्यों में काफी लोकप्रिय है. लेकिन इससे जुड़े कुछ ऐसे मिथक जिनका वास्तवकिता से कोई संबंध नहीं है.

रामायण के 6 मिथक और तथ्य

रामायण अब तक के सबसे दमदार महाकाव्यों में से एक है, लेकिन सदियों से इससे जुड़ी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है. आज हम आपको रामायण से जुड़े उन 6 मिथकों के बारे में बताएंगे जो समय के साथ काफी प्रचलित हो गई हैं, लेकिन उनकी सच्चाई इससे बिल्कुल भी उलट है.

रामायण में जब भी लक्ष्मण जी को याद करते हैं, तो कहा जाता है कि, वह 14 साल के वनवास के दौरान कभी सोए नहीं. जबकि हकीकत यह है कि, असली वाल्मीकि रामायण में साफतौर पर यह नहीं बताया गया है कि लक्ष्मण पूरे 14 साल तक जागते रहे.

रामायण को लेकर दूसरा मिथक यह है कि, रावण ने सीता के साथ जबरदस्ती की, लेकिन असल में रावण ने अपनी नैतिक सीमाओं के कारण कभी भी सीता पर दबाव डालने की कोशश नहीं की. कई परंपराओं में कहा जाता है कि, उसे एक श्राप का डर था और उसने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा, रावण जबरदस्ती के बजाय मनाने की कोशिश की.

रामायण से जुड़ा एक मिथक जब शूर्पणखा को केवल इसलिए सजा दी गई, क्योंकि उसने शादी का प्रस्ताव रखा था. दरअसल वास्तविकता यह है कि, महाकाव्य में शूर्पणखा जलन के कारण सीता को धमकाया और हमला करने की कोशिश की, जिसके कारण लक्ष्मण ने उसकी नाक काटकर उसे दंडित किया.

रामायण से जुड़ा एक अन्य मिथक कि, भगवान राम ने बाली को गलत तरीके से और बेइज्जती से मारा, लेकिन हकीकत यह है कि, भगवान राम ने इस कृत्य को सही ठहराया उन्होंने कहा कि, बाली ने अपने ही सगे भाई सु्ग्रीव की पत्नी और राज्य छीनकर धर्म तोड़ा था, और एक राजा होने के नाते उसे ऐसे कामों के लिए सजा देने का अधिकार था.

रामायण में लंका दहन कांड सबको पता है, जब हनुमान जी ने पूरी लंका को जलाकर राख कर दिया था. लेकिन असलियत यह है कि, हनुमान ने अधिकतर आग लगाई, रावण के सैनिकों द्वारा उनकी पूंछ जलाए जाने के बाद चेतावनी के तौर पर शहर के कुछ हिस्सों में आग लगा दी गई थी. लंका खुद पूरी तरह से नष्ट नहीं हुई थी.

रामायण से जुड़ा एक अन्य मिथक कि विभीषण ने अपने भाई रावण को धोखा दिया और दुश्मन का साथ दिया. जबकि विभीषण ने बार-बार रावण को सीता को लौटाने और युद्ध से बचने की सलाह दी. जब रावण ने मना कर दिया और अधर्म का रास्ता चुना, तो विभीषण लंका छोड़कर राम के साथ धर्म के पक्ष में खड़े हो गए.

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