सनातन धर्म में किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद परिवार के अन्य सदस्य मुंडन करवाते हैं. क्या यह केवल एक प्रथा है या इसके पीछे कोई ठोस कारण है? जानने के लिए पढ़ें यह खबर.
हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का वर्णन है. इनमें से एक महत्वपूर्ण परंपरा है मृत्यु के बाद परिवार के पुरुषों का सिर मुंडवाना. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि शोक की इस घड़ी में मुंडन क्यों करवाना होता है और क्या यह अनिवार्य है. आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण.
धार्मिक ग्रंथों और गरुड़ पुराण के अनुसार इसके पीछे कुछ विशेष कारण बताए गए हैं:
मोह और अहंकार का त्याग
हिंदू शास्त्रों में बालों को अहंकार और सुंदरता का प्रतीक माना गया है. परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर मुंडन करवाना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति सांसारिक सुखों और अपने अहंकार का त्याग कर रहा है. यह मृतक के प्रति विनम्रता और शोक प्रकट करने का एक तरीका है.
शुद्धि और पातक से मुक्ति
मान्यता है कि परिवार में किसी की मृत्यु होने पर पूरे परिवार पर ‘पातक’ (अशुद्धि) लग जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, मुंडन करवाने के बाद ही व्यक्ति शुद्ध होता है और अंतिम संस्कार की बाकी रस्मों, जैसे पिंडदान और श्राद्ध, को करने के योग्य बनता है.
आत्मा से मोह भंग करना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी आत्मा कुछ समय तक अपने परिवार के आसपास रहती है और मोहवश उनसे संपर्क करने की कोशिश करती है. कहा जाता है कि बाल नकारात्मक ऊर्जा को जल्दी आकर्षित करते हैं. मुंडन करवाकर व्यक्ति अपना रूप बदल देता है, ताकि आत्मा को यह आभास हो जाए कि अब उसका इस संसार और शरीर से रिश्ता खत्म हो चुका है, जिससे वह आसानी से यमलोक की ओर प्रस्थान कर सके.
वैज्ञानिक कारण
जब किसी मृत शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है, तो शव के जलने से वातावरण में कई तरह के सूक्ष्म हानिकारक कीटाणु और बैक्टीरिया फैल जाते हैं. बाल इन बैक्टीरिया को सोख लेते हैं, जो स्नान के बाद भी पूरी तरह साफ नहीं होते. इसलिए, स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) के नजरिए से भी मुंडन करवाना फायदेमंद माना जाता है.





