भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्ति के लिए हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे, जिसमें पहला बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत के दौरान किन गलतियों को करने बचना चाहिए और अनिष्ट से बचने के उपाय क्या हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख का महीना शुरू हो चुका है और इसमें दो प्रदोष व्रत पड़ने वाले हैं. दृक पंचांग के मुताबिक, वैशाख का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा. चूंकि 15 अप्रैल को बुधवार है, ऐसे में इस प्रदोष व्रत को लोग बुध प्रदोष व्रत के तौर पर मनाएंगे. शास्त्रों के अनुसार बुध प्रदोष व्रत के प्रभाव से बुद्धि स्थिर रहती है, वाणी में ओज आता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. शास्त्रों में प्रदोष व्रत से जुड़े विशेष नियम और सावधानियों का जिक्र किया गया है, जिसका पालन करना हर व्रती के लिए जरूरी है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन कुछ गलतियों को करे से भगवान शिव की कृपा प्राप्त नहीं होती. ऐसे में आइए जानते हैं कि वैशाख के पहले बुध प्रदोष व्रत पर किन गलतियों को करने से बचना चाहिए.
कब है बुध प्रदोष व्रत 2026
दृक पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 अप्रैल 2026 को देर रात 12 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी. जबकि, यह तिथि 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी. चूंकि, हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार के लिए उदया तिथि का महत्व है, इसलिए बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को ही रखा जाएगा. इस दिन प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 9 बजे तक रहेगा. ऐसे में आप इस दौरान भगवान शिव की विशेष उपासना कर सकते हैं, उनका अभिषेक कर सकते हैं.
बुध प्रदोष व्रत से जुड़े जरूरी नियम
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की जाती है. सुबह की पूजा के बाद शाम को फिर से स्नान कर शिव जी की पूजा-अर्चना करना जरूरी माना गया है. ऐसे में प्रदोष व्रत के इस नियम को ना भूलें.
कहा जाता है कि महादेव की सेवा में तन के साथ-साथ मन की शुद्धता भी जरूरी है. ऐसे में प्रदोष व्रत के दिन सात्विक विचार रखें और पूरे दिन भक्ति भाव में लीन रहें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दौरान नमक का सेवन वर्जित है. इसलिए प्रदोष व्रत के दिन फलाहार में भी सेंधा नमक से बचने का प्रयास करें.
प्रदोष व्रत की पूजा के अंत में अपनी अनजानी भूलों के लिए भोलेनाथ से क्षमा याचना जरूर करें. ऐसा करने से पूजा-पाठ में हुई गलतियों को शिवजी माफ कर देते हैं.
बुध प्रदोष व्रत पर ना करें ये काम
शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत के दिन क्रोध, झूठ, चुगली या किसी का अनादर करने से बचें. इस दिन वाद-विवाद से दूर रहकर मौन या मंत्र जाप करें.
प्रदोष के दिन प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों को हाथ भी नहीं लगाना चाहिए. इस दिन घर का वातावरण भी सात्विक बनाए रखें.
प्रदोष व्रत के दिन मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न लाएं. व्रत की शुभता की प्राप्ति के लिए शुभ और मंगलकारी विचार ही मन में रखें.
शास्त्रों के अनुसार, शिव पूजा में काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता. ऐसे में इस दिन सफेद, लाल या पीले रंग के साफ कपड़े पहनना ही शुभ माना गया है.
बुध प्रदोष व्रत की अवधि के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना चाहिए.
शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं?
हल्दी और सिंदूर- शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसलिए सौंदर्य प्रसाधन जैसे हल्दी और सिंदूर उन पर नहीं चढ़ाए जाते.
तुलसी दल और केतकी- पौराणिक कथाओं के अनुसार, महादेव की पूजा में तुलसी और केतकी के फूल पूरी तरह वर्जित हैं.
नारियल पानी- शिव जी पर नारियल चढ़ाया जा सकता है, लेकिन उसका जल (नारियल पानी) अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता.
खंडित अक्षत- शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले चावल (अक्षत) खंडित या टूटे हुए नहीं होने चाहिए. इसलिए पूजन के दौरान सिर्फ साबुत चावल ही शिवलिंग पर अर्पित करें.





