पश्चिम बस्तर डिवीजन में लंबे समय तक सक्रिय रहकर नक्सली संगठन की कमान संभालने वाला नक्सली लीडर पापा राव अब आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आया है। बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले पापा राव का यह फैसला फोर्स के बढ़ते दबाव, कमजोर पड़ते नक्सल नेटवर्क की कहानी भी बयां करता है।
पापा राव अब मुख्यधारा में लौटकर राजनीति के जरिए अपनी नई पहचान बनाना चाहता है। दैनिक भास्कर प्रतिनिधि ने पापा राव से खास बातचीत की। सरेंडर क्यों किया, डर गए थे क्या? के सवाल पर उन्होंने कहा- डरा नहीं, मैं जहां सक्रिय था वहां फोर्स ने 18 कैंप खोल दिए, जिससे छिपने की जगह नहीं बची थी। पापा राव ने सरेंडर की असली वजहों, जंगल के बदलते हालात और आगे की योजनाओं पर खुलकर बात की। प्रस्तुत है बातचीत के विस्तृत अंश…..
आत्मसमर्पण के बाद अब क्या करेंगे? -सबसे पहले घर जाऊंगा। वहां आराम से रहूंगा। अपनों से मिलूंगा।
पहले नक्सली के तौर पर लोगों की आवाज उठाते थे, अब क्या करेंगे। -चुनाव लड़ने की इच्छा है। यहां से निकलने के बाद चुनाव लड़ूंगा।
किस पार्टी से और किस पद पर चुनाव लड़ेंगे? -अभी तय नहीं है कि किस पार्टी से लड़ूंगा, लेकिन चुनाव लड़ने की इच्छा है।
सरेंडर क्यों किया? डर गए या कोई और कारण? -मैं डरा नहीं था। मेरे ज्यादातर साथियों ने सरेंडर कर दिया था। जिस इलाके में मैं सक्रिय था, वहां फोर्स के 18 कैंप खुल गए थे। जंगल में छिपने की जगह नहीं बची, इसलिए वापस आ गया।
लेवी के पैसे कहां-कहां डंप हैं और कितनी राशि है? -पैसों की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होती थी। अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग लोग इसे संभालते हैं, इसलिए विस्तृत जानकारी नहीं है।
आप हिड़मा से सीनियर थे, उन्हें सीसी मेंबर बनाया और आपको डीकेएसजेडसी, ऐसा क्यों? -मैं हिड़मा से सिर्फ एक साल सीनियर था। संगठन में पद सीनियारिटी से ज्यादा व्यक्ति की क्षमता और गुणों के आधार पर दिए जाते हैं। वह सीसी मेंबर बना, यह उसकी काबिलियत थी।
ज्यादा काम किस इलाके में किया? -मैंने जगरगुंडा इलाके में सबसे ज्यादा काम किया। 2010 में वहां की पूरी जिम्मेदारी मेरे पास थी।
अक्सर आपके मारे जाने की खबरें आती थीं, यह क्या था? – (मुस्कुराते हुए) मैं चार बार मरा। कभी किडनी फेल होने से, कभी शुगर से, तो कभी सांप के डसने से। मीडिया ने इन खबरों को ज्यादा फैलाया।





