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पंचायत सचिव भर्ती घोटाला : कार्रवाई में देरी पर फूटा गुस्सा, जिपं सीईओ पर अपात्र उम्मीदवारों को संरक्षण देने का आरोप

बीजापुर. सत्ताबदल के बाद जिले में 9 साल पहले पंचायत सचिव भर्ती में हुआ घोटाला फिर सुर्खियों में है. मामला 2015 में भाजपा सरकार के कार्यकाल का है, लेकिन पीड़ित उम्मीदवारों को कांग्रेस सरकार के 5 साल के कार्यकाल में भी न्याय नहीं मिला. अब चूंकि भाजपा एक बार फिर सत्तासीन है, इसलिए पीड़ितों ने पूर्व मंत्री महेश गागड़ा के सामने घोटाले से जुड़े जांच प्रतिवेदनों के आधार पर अविलंब कार्रवाई कर न्याय की गुहार लगाई है.

आवेदक विकास कुमार मोरला, प्रताप सिंह सेमल, सुशील दुर्गम, गोविंदा मडकम ने पूर्व मंत्री के नाम ज्ञापन में इस बात का जिक्र किया है कि वर्ष 2015 में फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई थी.। मामला संज्ञान में आने के बाद जिपं बीजापुर ने उपसंचालक पंचायत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच दल द्वारा प्रकरण की जांच कराई. इसी तरह कार्यालय कलेक्टर द्वारा भी संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था. जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि भर्ती में गड़बड़ियां हुई है. निःसंदेह स्वार्थवश अपात्र अभ्यार्थियाें को फायदा पहुंचाने चयन समिति ने फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था. नियम-निर्देशों तथा विज्ञापित पदों में आरक्षण रोस्टर को दरकिनार कर अपात्र उम्मीदवारों को नियुक्तियां प्रदान की गई थी.

पीड़ित पक्ष का कहना है कि दो-दो जांच प्रतिवेदनों के आधार पर आज पर्यंत कार्रवाई नहीं हुई है. आरोप है कि सीईओ जिपं की ओर से पात्र अभ्यार्थियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर सीईओ ने नए सिरे से जांच बिठाने की बात कही है. इस मामले में सीईओ जिपं की भूमिका भी संदेहास्पद है.

पीड़ित उम्मीदवाराें ने पूर्व मंत्री को भाजपा के घोषणा पत्र के पृष्ठ क्रमांक 39 भर्ती संबंधित गड़बड़ियों का उल्लेख का स्मरण कराते हुए सीईओ जिपं बीजापुर को प्रकरण से पृथक करने के साथ अपात्र अभ्यार्थियाें के विरूद्ध अविलंब कार्रवाई करते न्याय की गुहार लगाई है.

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