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शादी-संतान की इच्छा पूरी करता है ये चमत्कारी कुआं! जानिए ‘बोटानी बावी’ का रहस्य?

आंध्र प्रदेश के दिविली तिरुपति गांव में स्थित श्रृंगार वल्लभ स्वामी का मंदिर जो अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है. कहते हैं कि, इस प्राचीन कुएं में नहाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

बोटनी बावी चमत्कारी कुआं शादी संतान की कामना

क्या आपको भी शादी में देरी या संतान प्राप्ति करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? एक छोटे से गांव में भक्तों का मानना है कि, भगवान विष्णु ने खुद ऐसी समस्याओं का हल निकालने के लिए एक पवित्र कुआं बनाया है. स्थानीय लोगों की मान्यताओं के मुताबिक, इस पुराने कुएं को बोटनी बावी के नाम से जाना जाता है और कहा जाता है कि, यह हजारों वर्ष पहले भगवान की नाभि से निकला था. कई लोग मानते हैं कि, इसके पानी में दिव्य शक्तियां हैं.

भक्तों का मानना है कि, सदियों पुराने इस कुएं में डुबकी लगाने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, चाहे वह शादी हो या बच्चा पैदा होना हो, पढ़ाई या फिर करियर से जुड़ी चिताएं. लोगों के बीच इस कुएं को लेकर मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति यहां आता है और कुएं के पानी से नहाता है, तो समय के उसकी समस्या दूर होने लगती है.

यह जगह दिलचस्प कहानियों से भी जुड़ी है, जिसमें यह भी दावा किया जाता है कि, यहां कभी भगवान की लिखी हुई चीजें बनी थीं, लेकिन यह पवित्र जगह असल में कहां हैं और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है?

आंध्र प्रदेश का अविभाजित पूर्वी गोदावरी क्षेत्र लंबे समय से अपनी आध्यात्मिक विरासत के लिए जाना जाता है. काकीनाड़ा जिले में डिविली के समीप तिरुपति गांव है, जिसे वहां के लोग अक्सर इसे दूसरा तिरुपति भी कहते हैं. यहां भगवान नारायण की पूजा श्रृंगार वल्लभ के रूप में की जाती है. माना जाता है कि, यह भक्तों की इच्छाएं पूरी करने वाला एकमात्र पूजनीय रूप है. दिलचस्प बात यह है कि, स्थानीय लोग बताते हैं कि, भगवान उसी ऊंचाई से प्रकट होते हैं, जहां से कोई भक्त उन्हें देखता है.

वडापल्ली के मशहूर वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दिविलि तिरुपति गांव में श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर में काफी सारे भक्त आते हैं. भगवान की पूजा सात हफ्ते वाले श्रृंगार वल्लभ स्वामी के तौर पर की जाती है. इस पवित्र जगह की सबसे खास बात यह है कि, बोटानी बावी जिसके बारे में कहा जाता है कि यह करीब 2 हजार साल पुरानी है.

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, बोटानी बावी देवता की नाभि से निकली थी और प्राचीन समय में ईश्वरीय मदद से बनाई गई थी. आज भी कुएं के अंदर पानी दिखाई देता है, जो सतह के समीप दिखता है. कई जोड़े और लोग इस स्थान पर आते हैं, रस्में निभाते हैं और कुएं में डुबकी लगाते हैं. पुजारी कहते हैं कि, कई भक्त बाद में यह बताने के लिए लौटते हैं कि, उनकी शादी या बच्चे पैदा करने जैसी इच्छाएं कुछ महीनों में ही पूरी हो गईं.

इस पवित्र स्थान पर जाने के लिए यात्री राजमुंदरी के नजदीक समालकोट रेलवे स्टेशन तक ट्रेन ले सकते हैं, इसके बाद ऑटो से पेड्डापुरम और आगे दिविलि तिरुपति गांव जा सकते हैं. राजमुंदरी या विशाखापत्तनम से बस से आने वाले लोग कट्टीपुडी हाईवे से पहुंच सकते हैं और करीब 20 किमी तक चल सकते हैं. मंदिर में शनिवार को सबसे ज्यादा लोग आते हैं, और कई भक्त नजदीक के गांव से ही तीर्थ यात्रा पर आते हैं.

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