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सोमवार को ED द्वारा अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में 8 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

सोमवार को ED द्वारा अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में 8 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इस छापे में 66 लाख नगद, 37 किलो चांदी मिली है।

रायपुर। भारतमाला परियोजना घोटाले में सोमवार को अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में ED के छापे की कार्रवाई पूरी हो गई है। छापे के बारे में ED ने प्रेस नोट जारी कर खुलासा किया। ED के मुताबिक, छापे में 66 लाख नगद, 37 किलो चांदी के जेवरात और चांदी की ईंट सहित डिजिटल एविडेंस मिले हैं।

आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए
ED ने बताया कि, रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने 28 अप्रैल को PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में स्थित 8 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह अभियान भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले अवैध रूप से मुआवज़ा प्राप्त करने के मामले में चलाया गया था।

तलाशी अभियान के दौरान, 66.9 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा, 37.13 किलोग्राम वज़न की चांदी की ईंटें और अन्य चांदी की वस्तुएं, डिजिटल उपकरण और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए।

अवैध रूप से मुआवज़ा प्राप्त करने का आरोप
ED ने PMLA, 2002 के तहत जांच तब शुरू की, जब ACB/EOW, रायपुर ने अभनपुर, रायपुर के तत्कालीन SDO (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी।

FIR में आरोप लगाया गया था कि, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके, रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित सरकारी भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर और जालसाज़ी करके अवैध रूप से मुआवज़ा प्राप्त किया था।

आपराधिक साजिश रचने का खुलासा
ED की जांच में पता चला कि, आरोपियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साज़िश रची। उन्होंने NHAI, रायपुर द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद भी जानबूझकर भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित करके, और धारा 3D के तहत अधिसूचना जारी होने से पहले भूमि के कई छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर धोखाधड़ी से अतिरिक्त मुआवज़ा प्राप्त किया।

हिरफेर कर बांटा गया ज्यादा मुआवजा
जांच में यह भी सामने आया कि संशोधित/हेरफेर किए गए खसरा रिकॉर्ड के आधार पर मुआवज़ा स्वीकृत और वितरित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप मुआवज़े का भुगतान बढ़ा-चढ़ाकर किया गया। इस प्रकार प्राप्त अतिरिक्त मुआवज़ा ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) की श्रेणी में आता है, जिससे सरकारी खजाने को अनुचित नुकसान हुआ और आरोपियों को उसी अनुपात में अवैध लाभ प्राप्त हुआ। आगे की जांच जारी है।

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