mor36garh-logo

पाकिस्तान में हैं कई जैन मंदिर, एक तो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची तक पहुंचा

महावीर जयंती का अवसर भक्ति, साधना, तप, ज्ञान, सत्य और करूणा का संदेश देता है. इस मौके पर जानिए जैन धर्म की प्राचीन मंदिरों के बारे में जो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मौजद हैं.

भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थकर थे. हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान महावीर की जयंती (Mahavir Jayanti) के रूप में मनाया जाता है. इस साल महावीर जयंती 31 मार्च 2026 को मनाई जा रही है.

भगवान महावीर का जीवन आध्यात्मिक रूझान, भक्ति और तपस्या का उदाहरण है. राजघराने में जन्मे राजकुमार वर्धमान ने आध्यात्म के जरिए अपने जीवन की दिशा बदल दी और भगवान महावीर कहलाए. महावीर जयंती के पावन अवसर पर जैन धर्म की ऐतिहासिक विरासत की चर्चा भी जरूर होनी चाहिए.

भारत समेत दुनियाभर में जैन धर्म के कई प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर हैं. लेकिन आज आपको बताते हैं जैन धर्म के उन मंदिरों के बारे में जो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मौजूद है. खास बात तो यह है कि, पाकिस्तान में जैन धर्म के एक-दो नहीं बल्कि कई मंदिर हैं. इनमें से कई मंदिर अब खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं तो कुछ मंदिरों में आज भी लोग दर्शन के लिए जाते हैं. वहीं कुछ को व्यावसायिक कारणों से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया.

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में कई जैन मंदिर और उनके अवशेष मौजूद हैं. हालांकि इनमें छह मंदिरों की सबसे अधिक चर्चा होती है और इन प्राचीन जैन मंदिरों का उल्लेख भी किया जाता है. एक मंदिर का इतिहास तो करीब 800 वर्ष पुराना है तो वहीं एक को 9वीं सदी का भी बताया जाता है. ये मंदिर आज भी जैन धर्म की समृद्ध परंपरा और इतिहास की गवाही देते हैं.

जैन दिगंबर मंदिर (Jain Digambar Temple)- इस मंदिर में एक शिखर है. लेकिन वर्तमान में यह एक इस्लामी स्कूल के रूप में संचालित है. 1992 के दंगों के दौरान, जब इस्लामी चरमपंथी बाबरी मस्जिद के विध्वंस और भारत में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा का विरोध कर रहे थे, तब इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था.

नगर बाजार मंदिर (Nagar Bazar Temple)- यह मंदिर भी शिखर और तोरोना प्रवेश द्वार समेत पूरी तरह से सुरक्षित है. प्रवेश द्वार भव्य, स्वतंत्र रूप से खड़ा और सजावटी है. बताया जाता है कि, यह मंदिर 1947 में पाकिस्तान की स्वतंत्रता तक और उसके बाद भी कुछ वर्षों तक उपयोग में था. यह नंगर पारकर कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित है.

कर्रोनजर जैन मंदिर (Karronjar Jain Temple)- करूंझर जैन मंदिर वर्तमान में पाकिस्तान में करूंझर पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है, जो नागरपारकर मंदिरों के लिए जाना जाता है.

भोडेसर जैन मंदिर (Bhodesar Jain Mandir)- यह जैन मंदिर पाकिस्तान के सिंध-प्रांत में नागरपारकर के पास स्थित है. मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. हालांकि अब यह खंडहर होता है. इस मंदिर को सबसे पुराना 9वीं सदी का बताया जाता है. जबकि अन्य दो मंदिर 14वां और 15वीं सदी के हैं.

वीरवाह जैन मंदिर (Virvah Jain Mandir)- वीरवाह जैन मंदिर यहां के जैन मंदिरों के अवशेषों का संग्रह है. यहां के एक मंदिर में 27 देवकुलिकाएं थीं, जो पवित्र मंदिर को घेरे हुए अलंकृत स्तंभ थे.

गौरी जैन मंदिर (Gori Jain Mandir)- इस मंदिर का निर्माण 52 सहायक मंदिरों के साथ 1375-76 ईस्वी में हुआ था. यह जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर गोरी पार्श्वनाथ को समर्पित है और वीरवाह से 24 मील की दूरी पर स्थित है. इस मंदिर को 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया था.

Mor36garh

Mor36garh

Related News