भारत से ग्रसी, जापान और कंबोडिया तक फैली रहस्यमयी मंदिर आस्था, श्राप, विवाद और इतिहास की अनकही कहानियों को आपने आप में समेटे हुए है. जानिए इन मंदिरों के रहस्यों और महत्व के बारे में.
भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप
1.भारत के झारखंड में स्थित छिन्नमस्ता मंदिर जहां देवी की पूजा की जाती है, जिनका सिर नहीं होता. स्थानीय लोगों का मानना है कि, उनकी पूजा-अर्चना का अनादर करने का श्राप लगता है, अचानक दुर्घटनाएं या दुर्भाग्य. भक्त उनके प्रकोप से बचने के लिए कड़े नियमों का पालन करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि, श्राप उन्हीं पर पड़ता है, जो उनकी शक्ति का उपहास करते हैं.
2.डेल्फी ग्रीस में अपोलो का मंदिर जो कभी प्रसिद्ध भविष्यवाणी स्थल रहा यह यूनानी मंदिर ईसाई धर्म के प्रसार के साथ ही वीरान हो गया. प्राचीन कथाओं में चेतावनी दी गई थी कि, जो इसे नुकसान पहुंचाएगा उस पर श्राप लगेगा. आज भी आंगतुकों को एक रहस्यमय अनुभूति होती है, मानो भविष्यवाणी स्थल की आत्मा अभी भी खंडहरों की रक्षा कर रही है.
3.केरल का कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर जो उग्र देवी को समर्पित है, अपनी उग्र अनुष्ठानों को लेकर हुए विवादों के बाद अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था. कुछ भक्त उनके सम्मान में जोशीले गीत गाते थे, लेकिन आलोचकों ने इसे अनुचित बताया, जिसके चलते सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया. यह मंदिर अब खुला है, लेकिन इसके अतीत ने बड़े विवाद खड़े कर दिए थे.
4.जापान का फुशिमी इनारी ताइशा उप मंदिर आज भी फल-फूल रहा है. वहीं आसपास के छोटे मंदिर उपेक्षा या भूकंप जैसी आपदाओं के कारण बंद हो गए हैं. कम आंगतुकों और मरम्मत के लिए धन की कमी की वजह से ये कभी पवित्र रहे स्थल वीरान पड़े हैं और इनकी वेदियों पर धूल की मोटी पर जमती जा रही है.
5.गुजरात के सोमनाथ मंदिर को संपत्ति और आस्था को निशाना बनाकर कई बार आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया. हर बार भक्तों ने इसके पुनर्निमाण किया लेकिन इसका हिंसक इतिहास इसे भक्ति और संघर्ष दोनों का स्थल बनाता है, जो सदियों के हमले में क्षतिग्रस्त है.
6.कंबोडिया ता प्रोहम मंदिर घने जंगलों से घिरे खंडहरों के लिए प्रसिद्ध ता प्रोहम,खमेर साम्राज्य के पतन के बाद जीर्ण-शीर्ण अवस्था में छोड़ दिया गया था. विशाल वृक्षों ने इसके पत्थरों को ढक लिया है, स्थानीय लोगों का मानना है कि, यहां आत्मा का वास है. पर्यटक इसकी सुंदरता से मोहित हैं, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि इसे अकेला छोड़ देना ही बेहतर है.
7.थाईलैंड वाट फ्रा धम्मकाया धोखाधड़ी के आरोप लगने के बाद इस आधुनिक बौद्ध मंदिर को बंद होने का खतरा मंडराने लगा. अधिकारियों ने मंदिर पर छापा मारा और कई अनुयायी मंदिर छोड़कर चले गए. हालांकि यह मंदिर अभी भी चल रहा है, लेकिन इसकी प्रतिष्ठा धूमिल हो चुकी है, जो दिखाता है कि, कैसे घोटाला किसी पवित्र स्थान को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
8.करणी माता मंदिर राजस्थान का एक ऐसा मंदिर जिसे चूहा मंदिर के नाम से जाना जाता है, जहां हजारों चूहे पवित्र माने जाते हैं. लोककथाओं के मुताबिक, चूहे को नुकसान पहुंचाने से दुर्भाग्य या बिमारी का अभिशाप मिलता है. आंगतुक सावधानी से चलते हैं, क्योंकि वे देवी के पवित्र प्राणियों पर पैर रखकर उन्हें क्रोधित करने से बचते हैं.





