mor36garh-logo

बीजापुर में चोरी हो रहीं दुर्लभ पाषाण प्रतिमाएं, बस्तर की प्राचीन नागवंश काल की संपदा पर संकट

माओवादी हिंसा से मुक्ति के बाद बस्तर को विकसित बनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंचल की पुरातात्विक संपदा अब भी उपेक्षित है।

माओवादी हिंसा से मुक्ति के बाद बस्तर को अगले पांच साल में देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे शासन-प्रशासन को अंचल की पुरातात्विक संपदा के संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। बस्तर में शासन-प्रशासन की ओर से सबसे उपेक्षित पुरातात्विक धरोहर ही रहे हैं। माओवादी हिंसा से मुक्ति के बाद आज भी वही स्थिति जस की तस बनी हुई है।

तीन दशक तक माओवादियों का था कब्जा

तीन दशक से अधिक समय तक इस रिजर्व क्षेत्र में माओवादियों का कब्जा था, इसलिए पुरातत्व विभाग ने कभी पुरातात्विक संपदा के संरक्षण की कोशिश ही नहीं की। कुछ अवसरों पर पुरातात्विक सर्वेक्षण की योजनाएं बनाई गईं, लेकिन माओवादियों के भय से सर्वेक्षण दलों ने रिजर्व क्षेत्र में जाने से मना कर दिया था। यही वजह है कि आज तक इन धरोहरों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, सूचीकरण और फोटोग्राफी तक नहीं हो पाई है। अभी भी पुरातत्व विभाग इन धरोहरों के संरक्षण को लेकर मौन साधे हुए है। जबकि अब क्षेत्र में शांति स्थापित हो चुकी है।

जंगल सफारी से बढ़ा तस्करी का खतरा

अब जबकि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू करने की जोर-शोर से तैयारी चल रही है, ऐसे में पुरातात्विक धरोहरों की चोरी न हो, इसके लिए भी ठोस नीति बनाने की जरूरत है। शांति स्थापित होने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ी है और जंगल सफारी शुरू होने पर यह और बढ़ेगी। ऐसे में बिना सुरक्षा के इन अमूल्य मूर्तियों की तस्करी और अवैध हस्तांतरण का खतरा बढ़ गया है।

गायब हो रहीं प्रतिमाएं, संरक्षण जरूरी

दुर्भाग्य से अब तक इन धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस प्रयास नहीं हुए हैं। जागरूकता और जानकारी के अभाव में ये प्रतिमाएं असुरक्षित हालत में पड़ी हैं। कई गांवों से प्रतिमाओं की चोरी की खबरें भी आती रही हैं। कुछ ग्रामीण इन्हें घरों में रखकर पूजा करते हैं, जो आस्था का विषय है। लेकिन कई मामलों में बाहरी तस्कर इनका सौदा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरातत्व एवं संस्कृति और वन विभाग को ग्राम सभाओं के समन्वय से सर्वेक्षण, सूचीकरण, फोटोग्राफी और वैज्ञानिक संरक्षण की कार्ययोजना बनाकर संरक्षण के लिए काम करना जरूरी हो गया है। तभी बस्तर की इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाया जा सकेगा।

Mor36garh

Mor36garh

Related News