बॉलीवुड के कई सितारे पॉलिटिशियन भी हैं जिन्हें सरकार से सैलरी मिलती है. यहां इन सितारों को मिलने वाली सैलरी के अलावा दूसरे बेनिफिट्स के बारे में भी जान सकते हैं.
बॉलीवुड के कई सितारे राजनेता भी हैं. इनमें कंगना रनौत से लेकर अरुण गोविल और रवि किशन सहित कई नाम शामिल हैं. ये सितारे फिल्मों से तो काफी मोटी कमाई करते ही हैं वहीं इन्हें सरकार से भी सैलरी और दूसरे भत्ते मिलते हैं. चलिए यहां जानते हैं बॉलीवुड के इन सितारों को सरकार से कितना वेतन मिलता है.
कंगना रनौत को सरकार से कितनी मिलती है सैलरी?
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से बीजेपी सांसद हैं. सभी सांसदों की तरह कंगना रनौत को भी 1 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है. हालांकि मार्च 2025 में सांसदो की सैलरी 24% बढ़ी है. इस वजह से अब इन्हें एक लाख 24 हजार मिलते हैं.. मणिकर्णिका स्टार को सैलरी के अलावा निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के रूप में हर महीने 87,000 रुपये भी मिलते हैं. भारत सरकार उन्हें स्टेशनरी, कर्मचारियों के वेतन और अन्य ऑफिस खर्चों के एक्स्ट्रा 75,000 रुपये भी देती है. जबकि डेली अनाउंस 25 सौ रुपये मिलते हैं
अरुण गोविल को कितनी मिल रही है सरकारी सैलरी?
बता दें कि अरुण गोविल भी सांसद के रुप में अरुण गोविल की सैलरी एक लाख 24 हजार रुपये है. वहीं सरकार से उन्हें भी लोकसभा क्षेत्र के लिए भत्ते के रुप में 87 हजार रुपये और स्टेशनरी, स्टाफ सैलरी एवं अन्य खर्चों के लिए 75 हजार रुपये भी मिलते हैं. वहीं सांसदों को डेली खर्च के लिए 25 सौ रुपये भी अलग से मिलते हैं. उन्हें सरकारी घर की सुविधा भी मिलती है.
रवि किशन को कितनी मिल रही है सरकारी सैलरी
रवि किशन भी गोरखपुर से बीजेपी सांसद हैं उन्हें भी एक लाख24 हजार रुपये मंथली सैलरी के अलावा सांसदों को मिलने वाले सारे भत्ते मिलते हैं. उन्हें भी डेली अलाउंस के लिए ढाई हजार रुपये मिलते हैं.
जया बच्चन को कितनी मिलती है सरकारी सैलरी
जया बच्चन राज्यसभा सांसद हैं. और उन्हें भी सांसदों को मिलने वाली सैलरी और तमाम भत्ते मिलते हैं. 2025 में केंद्र सरकार की मंजूदी के बाद राज्यसभा सांसदों के वेतन में भी 24 फीसदी का इजाफा हुआ था. जिसके बाद जया बच्चन का हर महीने का वेतन 1 लाख 24 हजार रुपये है. वहीं उन्हें भी 25सौ रुपये डीए मिलता है. जबकि निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के तौर पर 87 हजार रुपये मिलते हैं. इनके अलावा भी अन्य भत्ते मिलते हैं.




