शश राजयोग को ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शक्तिशाली योग माना गया है। जानें कुंडली में इसका निर्माण कैसा होता है और शश योग के बनने से व्यक्ति को जीवन में कैसे परिणाम प्राप्त होते हैं।
शनि ग्रह को ज्योतिष में न्याय का देवता कहा जाता है। कुंडली में इनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। इनकी शुभ स्थिति जहां रंक को राजा बना सकती है वहीं विपरीत स्थिति में शनि राजा को रंक भी बना सकते हैं। शनि ग्रह कुंडली में बैठकर कई योग भी बनाते हैं और इनमें से एक है शश राजयोग। ज्योतिष में शश राजयोग को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसकी कुंडली में स्थिति रंक को राजा बना सकती है। यह योग बनता कब और कैसे बनता है, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
शश योग कब और कैसे बनता है
शनि का शश योग अगर किसी की जन्म कुंडली में है तो आजीवन इसका शुभ प्रभाव व्यक्ति को मिलता है। वहीं शश योग अगर कुंडली में नहीं है तब भी कभी न कभी वर्षफल में इसका निर्माण अवश्य होता है। यानि आपके जीनन के किसी न किसी साल में शश योग आपके जीवन को सुधार सकता है। आइए अब जानते हैं कि शश योग बनता कैसे है।
शश योग
शनि ग्रह जब कुंडली में अपनी राशियों मकर और कुंभ या फिर अपनी उच्च राशि तुला में बैठे हों और क्रेंद्र के भावों में स्थित हों यानि 1, 4, 7 और 10 तो शश राजयोग का निर्माण होता है। यह योग तब और भी अधिक शक्तिशाली होता है जब शनि को कोई अन्य ग्रह न देखे और साथ ही शनि कुंडली का कारक ग्रह हो।
शश योग के लाभ
- कुंडली में शश योग का होना आपको जबरदस्त सफलता दिलाता है। इस योग के साथ जन्मा व्यक्ति गरीब परिवार का होकर भी एक दिन राजा बन सकता है।
- शश योग के बनने से व्यक्ति कुशल राजनीतिज्ञ बन सकता है। ऐसे लोग सरकारी क्षेत्रों में भी उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं।
- वकालत के क्षेत्र में भी इनको सफलता मिलती है। जज, वकील आदि ये बन सकते हैं।
- शनि खा शश योग व्यक्ति को लंबी आयु और समाजा में मान-सम्मान भी दिलाता है।
- शश योग के साथ जन्म लेने वाला व्यक्ति मेहनती, अनुशासन प्रिय और सहनशील होता है।





