जनपद पंचायत सीतापुर की घोर लापरवाही सामने आई है कार्यक्रम खत्म होने के बाद अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया कि बच्चे जाएंगे कैसे।
ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हो गया। बुधवार को जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समापन के बाद सीतापुर ब्लॉक के 50 से अधिक बच्चे देर रात तक गांधी स्टेडियम में भूखे-प्यासे भटकते रहे। अधिकारियों को बच्चों की सुध तक नहीं रही। मामला तब उजागर हुआ जब बच्चों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को वीडियो कॉल कर आपबीती सुनाई। विधायक के सक्रिय होते ही जिला प्रशासन में खलबली मच गई और आधी रात को अफसरों को दौड़ना पड़ा। बच्चों ने दोपहर में भोजन किया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे सोच रहे थे कि उन्हें घर ले जाने के लिए बस आएगी, लेकिन समय बीतता गया। अधिकारी अपने घरों में आराम फरमा रहे थे और बच्चे गांधी स्टेडियम में बस का इंतजार कर रहे थे। रात करीब 10.30 बजे वहां से गुजर रहे शहरवासियों ने बड़ी संख्या में बच्चों को भटकते देखा तो मामला सामने आया।
वीडियो कॉल पर विधायक को बताई आपबीती
शहरवासियों के पहुंचने के बाद कुछ बच्चों ने वीडियो कॉल के माध्यम से विधायक रामकुमार टोप्पो से संपर्क किया। भूखे-प्यासे बच्चों ने बताया कि रात ज्यादा हो रही है और उन्हें घर जाना है। इस पर विधायक ने तत्काल जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया। विधायक के दखल के बाद जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव स्वयं गांधी स्टेडियम पहुंचीं। उनके साथ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला, खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जनपद के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे।
आधी रात को बना खाना, फिर दो बसों से भेजे गए बच्चे
पहले सभी बच्चों को नवापारा स्थित आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास ले जाया गया। वहां रात में भोजन तैयार करवाकर बच्चों को खिलाया गया। तब तक रात के 12 बज चुके थे। जिला पंचायत सीईओ की पहल पर तत्काल बस की व्यवस्था की गई। इसी बीच सीतापुर जनपद की ओर से जो बस आनी थी, वह भी देर से पहुंची। अधिकारियों ने दो बसों से बच्चों को सीतापुर रवाना किया और निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे को उसके घर तक सुरक्षित छोड़ा जाए। मध्य रात्रि के बाद सभी बच्चे अपने-अपने घर पहुंच सके। इस दौरान आधी रात तक गांधी स्टेडियम से लेकर छात्रावास तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
तीन लाख के बजट के बाद भी लापरवाही
पूरे घटनाक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ जनपद पंचायत सीतापुर की घोर लापरवाही सामने आई है कार्यक्रम खत्म होने के बाद अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया कि बच्चे जाएंगे कैसे। अब दलील दी जा रही है कि सीतापुर से जो बस बच्चों को लाने भेजी गई थी, उसमें तकनीकी खराबी आ गई थी, लेकिन इसकी सूचना समय पर अधिकारियों तक पहुंची या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। जब हर जनपद को तीन लाख रुपये का पर्याप्त आवंटन मिला था, तो फिर बच्चों को भूखा-प्यासा क्यों भटकना पड़ा,इसकी जांच शुरू कर दी गई है।





