इस बार तिथियों के विशेष क्रम के कारण उत्सव छह दिनों तक चलेगा। 6 नवंबर को धनतेरस से आरंभ होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ दीप महापर्व संपन्न होगा।
धनतेरस के पावन पर्व के साथ शुक्रवार से प्रकाश, आस्था और उल्लास के महापर्व दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। घर-आंगन में मंगल कलश सजेगा, बाजारों में धन-धान्य और समृद्धि के प्रतीक धातुओं की चमक बिखरेगी और देवालयों में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी तथा कुबेर देव का पूजन होगा। धनतेरस पर आरोग्य और समृद्धि की मंगलकामना से शुरू होने वाला दीपोत्सव, दीपावली की रोशनी, गोवर्धन पूजा की प्रकृति आराधना और भाई दूज के पारिवारिक स्नेह तक छह दिनों में भारतीय परंपरा के विविध रंगों को समेटेगा। दीपावली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में सुख-समृद्धि, आरोग्य, पारिवारिक आत्मीयता और आध्यात्मिक चेतना का पांच दिवसीय महापर्व है। इस बार तिथियों के विशेष क्रम के कारण उत्सव छह दिनों तक चलेगा। 6 नवंबर को धनतेरस से आरंभ होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ दीप महापर्व संपन्न होगा।
प्रदोषकाल में धनतेरस पूजन का विशेष महत्व
- ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, कुबेर देव, भगवान गणेश और यमदेव के पूजन का विधान है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य प्रदोष बेला में हुआ था, इसलिए प्रदोषकाल में पूजन का विशेष महत्व है।
- इस दिन घर की स्वच्छता के बाद पूजन स्थल पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें। भगवान गणेश का स्मरण कर संकल्प लें।
- इसके बाद पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित कर विधि-विधान से पूजन करें। भगवान धन्वंतरि से परिवार के आरोग्य और निरोगी जीवन की कामना करें।
- माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि तथा कुबेर देव से सद्बुद्धि और धन-धान्य की मंगलकामना की जाती है। संध्या समय दीपदान का भी विशेष महत्व है।
धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त
मुहूर्त : समय
प्रातःकाल : 9:10 से 10:40 बजे
दोपहर : 12:12 से 1:44 बजे
विशेष खरीदारी : 4:21 से रात 8:57 बजे
मेष लग्न : 4:27 से 6:04 बजे
वृषभ लग्न : 6:04 से 8:00 बजे
गोधूलि बेला : 5:19 से 7:39 बजे
अभिजीत मुहूर्त : 11:25 से 12:15 बजे
आठ नवंबर को प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन
- दीपावली की तिथि को लेकर धर्मशास्त्रीय गणना का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने धर्मसिंधु और व्रतराज ग्रंथों के आधार पर बताया कि कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में दीपावली मनाने और महालक्ष्मी पूजन का विधान है।
- व्रतराज में कहा गया है- ””ततः प्रदोषसमये पूजये दिन्दिराम शुभाम्।”” अर्थात प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए।
- धर्मसिंधु के अनुसार जिस दिन प्रदोषकाल में अमावस्या की व्याप्ति हो, उसी दिन महालक्ष्मी पूजन, संध्या दीपदान और महाकाली पूजन करना चाहिए।
- इसी शास्त्रीय विधान के अनुसार इस वर्ष रविवार, 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि आठ नवंबर को प्रातः 10:31 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन प्रातः 11:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में आठ नवंबर की प्रदोषव्यापिनी अमावस्या पर महालक्ष्मी पूजन होगा।
छह दिनों का दीपोत्सव
– छह नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस। भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का पूजन।
– सात नवंबर, शनिवार : नरक चतुर्दशी। अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा।
– आठ नवंबर, रविवार : दीपावली। प्रदोषकाल में महालक्ष्मी, गणेश और महाकाली पूजन।
– नौ नवंबर, सोमवार : श्राद्ध अमावस्या।
– 10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजन और अन्नकूट महोत्सव।
– 11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज। भाई-बहन के स्नेह और आत्मीयता का पर्व।





