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बलरामपुर में पंचायत प्रतिनिधियों का हल्लाबोल, मानदेय वृद्धि और 50 लाख अधिकार के लिए सौंपा ज्ञापन

बलरामपुर में पंचायत जनप्रतिनिधि संघ ने मानदेय वृद्धि, 50 लाख तक निर्माण अधिकार, सुरक्षा कानून और बीमा की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

पंचायत जनप्रतिनिधियों के सम्मानजनक मानदेय में वृद्धि, सुरक्षा कानून बनाने और ग्राम पंचायतों को पर्याप्त विकास बजट उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ पंचायत जनप्रतिनिधि संघ, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ने बुधवार को आवाज बुलंद की। जिले के सभी विकासखंडों से पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने बलरामपुर स्थित ऑडिटोरियम में बैठक आयोजित की। बैठक के बाद सभी प्रतिनिधि कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, राज्यपाल तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर शीघ्र पहल करने की मांग की। ज्ञापन में मानदेय की विसंगति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मनरेगा के अंतर्गत श्रमिकों को प्रतिदिन लगभग 300 रुपये पारिश्रमिक मिलता है, जबकि एक पंच को प्रति बैठक मात्र 16.66 रुपये मानदेय दिया जाता है। वहीं सरपंच को औसतन 133 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय प्राप्त होता है। इसकी तुलना में एक कुशल राजमिस्त्री को प्रतिदिन लगभग 900 रुपये पारिश्रमिक मिलता है। संघ का कहना है कि इतनी कम राशि में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षित जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन है। इससे उनके सम्मान और कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संघ ने बताया कि वाड्रफनगर की बैठक में सर्वसम्मति से जनप्रतिनिधियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और ग्राम पंचायतों को पर्याप्त एवं समयबद्ध विकास बजट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था।

ये हैं पंचायत जनप्रतिनिधि संघ की प्रमुख मांगें

ज्ञापन में पंचायत जनप्रतिनिधियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा कानून बनाने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत रंजिश के चलते जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने, गाली-गलौज करने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी परिस्थितियों में उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून आवश्यक है। इसके अलावा ग्राम पंचायतों को 50 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों की निर्माण एजेंसी का अधिकार देने तथा 50 लाख रुपये से कम के कार्यों को टुकड़ों में विभाजित कर अन्य एजेंसियों से नहीं कराने की मांग रखी गई है। मनरेगा के अंतर्गत सामग्री भुगतान के लिए समय-सीमा निर्धारित करने तथा तय समय में भुगतान नहीं होने पर आर्थिक मुआवजे का प्रावधान करने की मांग भी की गई है। संघ ने लंबित सामग्री भुगतान तत्काल जारी करने पर जोर देते हुए कहा कि कई सरपंचों ने पंचायत के कार्यों में सामग्री खर्च करने के लिए कर्ज तक लिया है। भुगतान नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रत्येक ग्राम पंचायत में 500 लोगों की क्षमता वाला सभा भवन सह मंगल भवन बनाने की मांग की गई है, ताकि वहां ग्रामसभा की बैठक के साथ शादी-विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकें।इसके साथ ही सभी पंचायत जनप्रतिनिधियों के लिए 10 लाख रुपये का सुरक्षा बीमा एवं दुर्घटना बीमा लागू करने की मांग की गई है।

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