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अंबिकापुर में आक्रामक हुआ लोनर हाथी, वनकर्मी समेत 6 महीने में 14 को मारा; वन विभाग की सुस्ती पर सवाल

सरगुजा और सूरजपुर सीमा पर एक लोनर हाथी ने 6 महीने में 14 लोगों की जान ली है। 

सरगुजा व सूरजपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में एक लोनर हाथी लगातार लोगों की जान ले रहा है। पिछले छह महीने में हाथी ने 14 लोगों को कुचलकर मार डाला है। क्षेत्र में कबरा के नाम से प्रचलित यह हाथी तेजी से मूवमेंट करता है। इंसानों को देखते ही आक्रमण करता है।

रविवार को दो लोगों को कुचलकर मार डाला

  • रविवार की शाम इस हाथी ने दो घंटे के भीतर दो लोगों को कुचलकर मार डाला। मरने वालों में एक वन विभाग का दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी और दूसरा आदिम जाति कल्याण विभाग में कार्यालय सहायक के पद पर कार्यरत था। ऐसे ही खतरनाक हाथियों के प्रबंधन के लिए सूरजपुर जिले के रमकोला में हाथी बचाव व पुनर्वास केंद्र विकसित किया गया है।
  • कर्नाटक से प्रशिक्षित हाथी लाए गए हैं। यहां बिगड़ैल हाथियों के व्यवहार परिवर्तन की भी व्यवस्था है, लेकिन 14 लोगों की जान लेने वाले हाथी को लेकर वन विभाग कोई पहल नहीं कर रहा है। खतरनाक हो चुके हाथी की लोकेशन ट्रैक करने के लिए इस पर कॉलर आइडी लगाई जा सकती है अथवा इसे ट्रेंक्यूलाइज कर उसे क्राल (विशेष बाड़ा) में रखा जा सकता है, लेकिन वन विभाग ने इस हाथी को खुला छोड़ रखा है। हाथी की आक्रामकता बढ़ती जा रही है लेकिन इसे रोकने का उपाय नहीं किया जा रहा है। अधिकारी प्रस्ताव और प्रक्रिया में ही उलझे हुए हैं।

इन कारणों से आक्रामक हो जाता है लोनर हाथी

  • हाथी सामाजिक प्राणी है, झुंड से अलग होने पर असुरक्षित महसूस कर आक्रामक हो जाता है। डर के कारण भी वह देखते ही इंसानों पर हमला करता है। नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ने पर मदकाल आता है, जिससे व्यवहार हिंसक हो जाता है। अकेले भोजन-पानी तलाशने में अनुभवहीनता से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। भीड़ द्वारा शोर मचाने, खदेड़ने या पत्थर फेंकने पर वह हमला कर देता है। साथी या शावक की मौत का मानसिक आघात भी उसे उग्र बनाता है।

लोनर हाथी के व्यवहार में आक्रामकता

लोनर हाथी का व्यवहार बदला हुआ है। इंसानों से इसे डर नहीं है, यह इंसानों को दौड़ाकर पकड़ लेता है। इसकी आक्रमकता को देखते हुए सूरजपुर डीएफओ के प्रस्ताव पर रेडियो कालरिंग के लिए हमने अनुशंसा कर प्रेषित कर दिया है। अनुमति मिलते ही कालरिंग के साथ विज्ञानी आधार पर इसका प्रबंधन किया जाएगा। इसके बाद भी व्यवहार नहीं बदला तो अंतिम विकल्प के रूप में पुनर्वास केंद्र में रखने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। डॉ प्रणव मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी सरगुजा वनवृत्त

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