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छत्तीसगढ़-ओडिशा महानदी जल बंटवारा: तीन दशकों के विवाद का 25 साल के समझौते से हो सकता है पटाक्षेप

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच तीन दशकों से जारी महानदी जल विवाद समाधान की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग ट्रिब्यूनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने जा रहा है जिससे दोनों राज्यों के मध्य पच्चीस साल का ऐतिहासिक जल समझौता संभव होगा। इसके साथ ही पोलावरम बांध के बैक वाटर प्रभाव और मुआवजे पर भी बातचीत आगे बढ़ सकेगी।

  1. महानदी जल विवाद पर 25 साल का समझौता
  2. केंद्रीय जल आयोग जल्द ट्रिब्यूनल को सौंपेगा रिपोर्ट
  3. पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र पर मुआवजाे की मांग

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले 43 वर्षों से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के गहरे विवाद का अब स्थाई समाधान निकलता नजर आ रहा है। दोनों पड़ोसी राज्यों के मध्य एक ऐतिहासिक 25 वर्षीय जल समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है।

जल बंटवारे का नया 46 एमएएफ फॉर्मूला

प्रस्तावित समझौते के अनुसार महानदी के कुल 46 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी के वैज्ञानिक और न्यायसंगत बंटवारे का खाका खींचा गया है। इस नए फॉर्मूले के तहत ओडिशा को 24 मिलियन एकड़ फीट और छत्तीसगढ़ को 22 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किए जाने का प्रावधान है।

28 सितंबर को रख चुके हैं दोनों राज्य अपना-अपना पक्ष

गौरतलब है कि 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल के समक्ष दोनों राज्यों ने अपने-अपने पक्ष रखे थे। इसके उपरांत आयोग द्वारा तैयार की जा रही विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट को दोनों राज्यों के व्यापक हितों में संतुलन साधने वाला माना जा रहा है।

पोलावरम बैकवाटर और मुआवजे पर आगे बढ़ेगी चर्चा

महानदी के साथ ही गोदावरी नदी पर आंध्र प्रदेश द्वारा बनाए जा रहे पोलावरम बांध परियोजना से जुड़े विवाद पर भी आगामी दिनों में निर्णायक बातचीत आगे बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने बांध के बैकवाटर यानी पीछे जमा होने वाले पानी का तकनीकी अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर को सौंपा था। यह अध्ययन अब पूरा हो चुका है जिसमें डुबान क्षेत्र में आने वाले सीमावर्ती गांवों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव की समीक्षा की गई है। राज्य सरकार अब इस रिपोर्ट के आधार पर आंध्र प्रदेश से प्रभावित गांवों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए उचित वित्तीय मुआवजे की मांग औपचारिक रूप से रखेगी।

गृह मंत्री अमित शाह की मध्यस्थता से सुलझे विवाद

दशकों पुराने महानदी विवाद के स्थाई निपटारे को लेकर बीते एक अक्टूबर को नई दिल्ली में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने राज्यों के पक्ष मजबूती से रखे थे। अगले महीने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में इस पर फिर से अहम बैठक होगी जिसमें अंतिम सहमति पर मुहर लग सकती है।

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