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ज्येष्ठ माह में इन कामों से बनाएं दूरी, वरना झेलना पड़ सकता है भारी नुकसान!

पंचांग के अनुसार हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ अपने प्रचंड ताप और गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है. इस दौरान सूर्य की तेज़ गर्मी के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस माह में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है, वहीं कुछ गलतियां जीवन में नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती हैं.

पंचांग के अनुसार, साल का तीसरा महीना ‘ज्येष्ठ’ अपनी प्रचंड गर्मी और विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है. साल 2026 में इस पवित्र महीने की शुरुआत 2 मई से हो रही है, जो 29 जून तक चलेगा. इस महीने का नाम ज्येष्ठ नक्षत्र के कारण पड़ा है, जिसके स्वामी मंगल हैं. धार्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान विष्णु, हनुमान जी (बड़े मंगल) और सूर्य देव की उपासना के लिए बहुत ही फलदायी माना जाता है. चूंकि इस दौरान सूर्य अपनी चरम सीमा पर होता है, इसलिए शास्त्रों में इस महीने के लिए कुछ कड़े अनुशासन और नियम बताए गए हैं. इन नियमों की अनदेखी करने पर व्यक्ति को न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं घेर सकती हैं, बल्कि आर्थिक और मानसिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है.

ज्येष्ठ माह का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह को भगवान विष्णु और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का समय माना जाता है. इस महीने में पड़ने वाले बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) का खास महत्व होता है, जिसमें भक्त हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह में जल दान, अन्न दान और जरूरतमंदों की सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, यह महीना तप, संयम और साधना का भी प्रतीक माना जाता है.

ज्येष्ठ माह में किन कामों से बनाएं दूरी?

तामसिक भोजन से दूरी रखें

इस महीने में मांस, शराब, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए. इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

जल का अपमान न करें

भीषण गर्मी के कारण पानी का महत्व और बढ़ जाता है. जल की बर्बादी करना या किसी प्यासे को पानी न देना अशुभ माना जाता है.

पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं

ज्येष्ठ माह में पेड़ों की सेवा करना पुण्यकारी माना गया है. इन्हें काटना या नुकसान पहुंचाना दोष का कारण बन सकता है.

क्रोध और विवाद से बचें

इस समय तापमान अधिक होने के कारण स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. ऐसे में गुस्सा और विवाद रिश्तों को खराब कर सकते हैं.

देर तक सोना और आलस्य

सुबह जल्दी उठकर स्नान, पूजा और ध्यान करना इस माह में विशेष फलदायी माना जाता है. आलस्य से बचना चाहिए.

क्या करें इस महीने में?

ज्येष्ठ माह में रोज़ाना स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना, व्रत रखना, गरीबों को जल और अन्न दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है. साथ ही, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ की सेवा करने से भी विशेष लाभ मिलता है.

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