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छत्तीसगढ़ किसानों ने मांगा ₹65,100 प्रति एकड़ मुआवजा, बाढ़ से तबाही के बाद पीएम-सीएम ने नाम सौंपा ज्ञापन

बाढ़ प्रभावितों ने कलेक्टर के माध्यम से पीएम मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपकर विशेष राहत एवं पुनर्वास पैकेज की गुहार लगाई है।

इंद्रावती नदी के बढ़े जलस्तर और भीषण अतिवृष्टि के कारण बस्तर जिले के विभिन्न ग्रामों में आई बाढ़ से भारी तबाही मची है। प्राकृतिक आपदा के चलते सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के मकान आंशिक व पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गए हैं, वहीं धान सहित अन्य फसलें, कृषि भूमि और घरेलू संपत्तियां जलमग्न होकर नष्ट हो गई हैं।

फसल क्षति पर 65,100 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा और कर्जमाफी की मांग

बाढ़ पीड़ितों ने मांग की है कि राजस्व विभाग से निष्पक्ष व वास्तविक सर्वे कराकर किसानों को प्रति एकड़ 65,100 रुपये (21 क्विंटल धान × 3,100 रुपये समर्थन मूल्य की दर से) की दर से फसल क्षति का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, बाढ़ से प्रभावित खसरा नंबरों के कृषि ऋणों को पूरी तरह माफ करने का आग्रह किया गया है, ताकि किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति मिल सके।

आरबीसी 6-4 के तहत सहायता और फसल बीमा की एक किस्त तुरंत देने की मांग

ज्ञापन में राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के प्रविधानों के तहत तत्काल आर्थिक सहायता जारी करने की मांग की गई है। साथ ही गंभीर रूप से प्रभावित किसानों को विशेष राहत के रूप में प्रति एकड़ 50,000 रुपये तक की सहायता देने पर विचार करने को कहा गया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान का त्वरित पंचनामा बनाकर बीमा राशि की कम से कम एक किस्त तत्काल खातों में अंतरित करने और भविष्य में किसानों की बिना सहमति के बीमा प्रीमियम राशि न काटने की मांग रखी गई है।

क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5 लाख तक सहायता और पीएम आवास में प्राथमिकता

बाढ़ में बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कराकर 1.20 लाख से 5 लाख रुपये तक की विशेष आवासीय सहायता देने की मांग की गई है। पूरी तरह से बेघर हो चुके परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता देने और आवास निर्माण में मजदूरी सहायता के रूप में वीबी-जी राम-जी (VB-G RAM-G) के अंतर्गत 50,000 रुपये तक अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाली 10,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की मांग की गई है।

बिहान योजना के महिला समूहों का ऋण माफ करने व सुरक्षित स्थान पर पट्टे की गुहार

इंद्रावती नदी की बाढ़ से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन से जुड़े आजीविका साधन पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। किस्तें चुकाने में असमर्थ महिलाओं के बैंक ऋण माफ करने की अपील की गई है। वहीं, बार-बार जलभराव की जद में आने वाले परिवारों को भविष्य की आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए ऊंचे स्थानों पर शासकीय भूमि आवंटित कर आवासीय पट्टा देने तथा स्थायी पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने का निवेदन किया गया है।

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