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रोमियो-जूलियट से लेकर एनिमल तक, दुनिया की हर कहानी इन 6 फॉर्मूलों पर ही बनी!

साहित्य और सिनेमा में दिखने वाली अनगिनत कहानियों के पीछे कुछ युनिकर्सल ढांचे काम करते हैं।

राइटर कर्ट वोनगट के Shapes of Stories वाले थ्योरी और 1700 से अधिक नोवल्स के ‘सेंटिमेंट एनालिसिस’ से यह सिद्ध हुआ है कि ज्यादातर कहानियां छह प्रमुख पैटर्नंस पर आधारित होती हैं। कभी कोई गरीब इंसान अमीर बन जाता है, तो कभी सफलता की ऊंचाई पर पहुंचा किरदार सब कुछ खो देता है। कुछ कहानियों में प्रेम की जीत होती है, तो कुछ का अंत दुखद होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों अलग-अलग कहानियों के पीछे कुछ समान कथानक छिपे हो सकते हैं?

कहानी का भी होता है एक आकार

अमेरिकन राइटर कर्ट वोनगट ने विचार दिया था कि कहानियों का भी एक आकार होता है, जिसे ग्राफ पर दिखाया जा सकता है। किसी कहानी में किरदार पहले मुश्किल में फंसता है और फिर उससे बाहर निकलता है। किसी दूसरी कहानी में उसे सफलता मिलती है, लेकिन अंत में उसका पतन हो जाता है। बाद में रिसर्चर्स ने कंप्यूटर की मदद से इस विचार को परखने की कोशिश की। उन्होंने सेंटिमेंट एनालिसिस तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें शब्दों को उनके भावनात्मक अर्थ के आधार पर समझा जाता है। इससे उपन्यासों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव के पैटर्न पहचानने में मदद मिली।

1. रैग्स टू रिचेस: संघर्ष से सफलता तक

इस कहानी में किरदार की शुरुआत मुश्किल परिस्थितियों से होती है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बेहतर होती जाती है। संघर्ष के बाद उसे सफलता, सम्मान या खुशहाली मिलती है। ऐसे कथानक में किरदार की प्रगति और उसकी मेहनत कहानी का अहम हिस्सा होती है।

2. रिचेस टू रैग्स: खुशहाली से बर्बादी तक

इसमें किरदार पहले अच्छी स्थिति में होता है, लेकिन घटनाएं धीरे-धीरे उसके खिलाफ जाने लगती हैं। गुस्ताव फ्लोबेयर के उपन्यास ‘मैडम बोवारी’ में एमा बोवारी अपनी जिंदगी से असंतुष्ट रहती है। उसके रिश्ते और आर्थिक परेशानियां बढ़ती जाती हैं और कहानी दुखद अंत तक पहुंचती है।

3. इकारस: ऊंचाई के बाद पतन

इस पैटर्न में किरदार की किस्मत पहले चमकती है, लेकिन बाद में हालात बिगड़ जाते हैं। शेक्सपियर के नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ में प्रेम कहानी उम्मीद जगाती है, लेकिन परिवारों की दुश्मनी और दुखद घटनाएं दोनों मुख्य किरदारों की मौत तक पहुंचती हैं। यहां शुरुआत की उम्मीद और अंत की त्रासदी के बीच का अंतर कहानी को प्रभावशाली बनाता है।

4. ओडिपस: गिरावट, सुधार और फिर संकट

इस कहानी में किरदार पहले मुश्किल में फंसता है, फिर कुछ समय के लिए हालात सुधरते हैं, लेकिन अंत में वह दोबारा संकट में पड़ जाता है। मैरी शेली के उपन्यास ‘फ्रैंकनस्टाइन’ में वैज्ञानिक विक्टर फ्रैंकनस्टाइन के प्रयोग के बाद घटनाएं उसके नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं। उसकी कहानी में उम्मीद और परेशानी के कई मोड़ आते हैं।

5. सिंड्रेला: मुश्किलों के बाद सुखद अंत

इस पैटर्न में किरदार को पहले कुछ अच्छा मिलता है, फिर वह मुश्किलों में फंसता है और आखिरकार हालात बेहतर हो जाते हैं। जेन ऑस्टिन के उपन्यास ‘प्राइड एंड प्रेजुडिस’ में एलिजाबेथ और डार्सी के रिश्ते में गलतफहमियां पैदा होती हैं। कई घटनाओं के बाद दोनों एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं और उनका रिश्ता सुधरता है।

6. मैन इन अ होल: मुसीबत से निकलकर कमबैक  

इस कहानी में किरदार सामान्य या अच्छी स्थिति से किसी परेशानी में फंस जाता है। संघर्ष के बाद वह उससे बाहर निकलने में सफल होता है। ऐसे कथानक में मुश्किलों का सामना करना और उनसे उबरना कहानी का मुख्य हिस्सा होता है। यह पाठकों को उम्मीद देता है कि बुरा समय हमेशा नहीं रहता।

क्या हर कहानी इन्हीं छह पैटर्न में आती है ?

हांस क्रिश्चियन एंडरसन की कहानी ‘द अग्ली डकलिंग’ यानी ‘बदसूरत बत्तख का बच्चा’ में दुख, अकेलेपन, संघर्ष और खुशी के कई दौर आते हैं। इसलिए इसे एक ही सरल भावनात्मक पैटर्न में बांटना मुश्किल हो सकता है।

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