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मार्केट बड़ा हो या न हो, पर भरोसेमंद होना चाहिए: वित्त मंत्री

SEBI Foundation Day 2026: विकसित भारत के लिए बेहतर और सुरक्षित बाजार जरूरी है. निर्मला सीतारमण ने कहा कि केवल मार्केट का साइज नहीं, बल्कि उसकी साख और निवेशकों का भरोसा सबसे ऊपर है.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में अपना 38वां स्थापना दिवस मनाया. इस खास मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के पूंजी बाजार (Capital Markets) के भविष्य को लेकर एक नई दिशा दिखाई. उन्होंने साफ कहा कि भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है, जहां शेयर बाजार का इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे आधुनिक है, लेकिन अब हमें केवल संख्या पर नहीं, बल्कि क्वालिटी और सुरक्षा पर ध्यान देना होगा.

क्या भारतीय बाजार अब दुनिया को रास्ता दिखा रहे हैं?

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत अब सिर्फ दुनिया के पीछे नहीं चलता, बल्कि कई मामलों में उनसे आगे है. उदाहरण के लिए, भारत ने T+1 सेटलमेंट (शेयर बेचने पर अगले दिन पैसा मिलना) जनवरी 2023 में ही लागू कर दिया था, जबकि अमेरिका जैसे विकसित देश ने इसे मई 2024 में अपनाया. इसके अलावा, IPO भरने के लिए ASBA और UPI जैसे सिस्टम ने शेयर बाजार को हर आम आदमी के स्मार्टफोन तक पहुंचा दिया है. आज NSDL और CDSL जैसी संस्थाओं में 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति डिजिटल रूप में सुरक्षित है.

बाजार की इस चमक में जोखिम कहां छिपा है?

निर्मला सीतारमण ने एक बड़ी चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि “बिना समझ के निवेश करना और बिना सुरक्षा के बाजार तक पहुंच जोखिम भरा हो सकता है.” वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 366 IPO आए, जिनसे करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए. लेकिन बढ़ते निवेश के साथ धोखाधड़ी और साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ा है. मंत्री ने कहा कि साइबर हमला केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि पूरे देश के भरोसे को तोड़ सकता है. इसके लिए उन्होंने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए बाजार में होने वाली हेराफेरी को रोकने पर जोर दिया.

KYC और बॉन्ड मार्केट में क्या बड़े बदलाव होंगे?

आम आदमी की परेशानी समझते हुए वित्त मंत्री ने KYC प्रक्रिया को आसान और पोर्टेबल बनाने की वकालत की. उनका लक्ष्य है कि नागरिकों को अलग-अलग निवेश के लिए बार-बार वेरिफिकेशन न कराना पड़े. साथ ही, उन्होंने कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने को कहा ताकि केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम दर्जे के संस्थान भी फंड जुटा सकें. उन्होंने नगर पालिकाओं के लिए ‘म्युनिसिपल बॉन्ड’ लाने पर भी जोर दिया, ताकि शहरों के विकास के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर न रहना पड़े.

सेबी के लिए आगे का ‘रोडमैप’ क्या है?

वित्त मंत्री का संदेश सीधा था कि “साइज से बड़ी साख (Integrity) है.” उन्होंने सेबी को ‘एंटीसिपेटरी रेगुलेशन’ यानी समस्या आने से पहले ही उसे भांप लेने की सलाह दी. भारत का लक्ष्य ‘विकसित भारत’ बनना है, और इसके लिए हमें ऐसे बाजार चाहिए जो टिकाऊ हों. उन्होंने सेबी की कानूनी मजबूती की भी तारीफ की, जहां अदालतों में सेबी की सफलता की दर 90% से भी अधिक है. अंत में उन्होंने कहा कि हमें बाजार को केवल ‘बड़ा’ नहीं, बल्कि ‘बेहतर’ बनाना है, जहां हर निवेशक सुरक्षित महसूस करे.

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