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खुशखबरी: कच्चे तेल के दाम $100 के पार भी पहुंचे, तो भी 7% की रफ्तार से बढ़ेगा भारत, Assocham की भविष्यवाणी

India GDP Growth: ASSOCHAM के अनुसार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर तक पहुंचने के बावजूद भारत की GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है. आइए जानते हैं, इस विषय में.

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर Assocham ने भरोसा जताया है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी बनी रहती है, तब भी देश की विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है. यानी कच्चे तेल की कीमतों में दबाव के बावजूद भी ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है.

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में देश ने कई मौकों पर महंगे तेल के असर के बीच अपनी क्षमता को मजबूत किया हैं. ASSOCHAM ने बताया कि देश पहले भी कई बार ऊंचे तेल कीमतों के दौर से गुजरा हैं. इसके बावजूद आर्थिक विकास की रफ्तार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा.

तेल महंगा रहा, फिर भी ग्रोथ पर नहीं पड़ा ज्यादा असर

1. ASSOCHAM के  मुताबिक 2000-01 से 2025-26 के बीच कई ऐसे साल रहे हैं जब कच्चे तेल की कीमतें मीडियम या हाई लेवल पर थी. हालांकि, इस दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत ग्रोथ दिखाई.

2. आंकड़ों की बात करें तो, 2022-23 में करीब 93 डॉलर प्रति बैरल तेल कीमत के बावजूद ग्रोथ 7.6 प्रतिशत रही थी. वहीं, 2023-24 में लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर भी विकास दर 7.2 फीसदी रही.

3. 2011 से 2014 के बीच तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था, तब भी GDP ग्रोथ 5.2 से 6.4 फीसदी के बीच रही थी. इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि, कच्चा तेल महंगा होने के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रही है.

GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रहने की उम्मीद

ASSOCHAM का कहना है कि 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है. इसकी बड़ी वजह मजबूत खपत, स्थिर एक्सपोर्ट और लगातार बढ़ रहा कैपिटल इन्वेस्टमेंट है.

संगठन के अध्यक्ष Nirmal Kumar Minda के मुताबिक, ये सभी फैक्टर मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं. साथ ही आगे भी ग्रोथ को सपोर्ट करते रहेंगे.

तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में हालात फिर से बिगड़ने के संकेत मिलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. आज 23 अप्रैल 2026 को WTI क्रूड ऑयल फ्यूचर की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. वहीं ब्रेंट क्रूड भी बढ़कर 102.501 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े पर पहुंच गया है. जिससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर इस तनाव का सीधा असर पड़ रहा है.

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