सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अमित जोगी ने दलील दी है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना ही सीबीआई की दलील पर 40 मिनट में फैसला सुना दिया.
करीब 23 साल पुराने एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 23 अप्रैल को सुनवाई करेगा.
दरअसल, रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी ठहराए जाने के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अमित जोगी ने दलील दी है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना ही सीबीआई की दलील पर 40 मिनट में फैसला सुना दिया.
गौरतलब है साल 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता राम अवतार जग्गी की बिलासपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. जग्गी उस समय विद्याचरण शुक्ला के करीबी और पार्टी के कोषाध्यक्ष थे. बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर आरोप लगाया था.
जग्गी मर्डर केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टरमाइंड बताते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद साल 2004 से 2007 तक निचली अदालत में चले केस के बाद साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी थी लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.
इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया था. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 23 साल पुराने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था.
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी करने के निर्णय को पूर्णतः अवैध, गलत और साक्ष्यों के प्रतिकूल करार देते हुए कहा था कि जिस साक्ष्य के आधार पर अन्य आरोपियों को साजिश का दोषी ठहराया गया, वही साक्ष्य अमित जोगी के मामले में बिना ठोस कारण खारिज कर दिए गए. उच्च न्यायालय ने पाया कि पूरी साजिश के मास्टरमाइंड अमित जोगी थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे और पुलिस मशीनरी पर असर रखते थे.
अदालत ने कहा कि इतनी बड़े स्तर की राजनीतिक साजिश, हमलावरों की व्यवस्था, भागने के रास्ते, फर्जी आरोपियों की प्लांटिंग और प्रारंभिक जांच भटकाने जैसा संगठित अपराध किसी बड़े नेतृत्व और संरक्षण के बिना संभव नहीं था. उच्च न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.





