भोपाल, इंदौर, अंबिकापुर, जगदलपुर और जबलपुर के बाद अब कोलकाता की फ्लाइट भी 25 अक्टूबर को दोबारा शुरू होने के अगले ही दिन 26 अक्टूबर को फिर बंद कर दी गई।
छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर स्थित ‘बिलासा देवी केवट हवाई अड्डे’ से हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत शुरू की गईं उड़ानें एक-एक कर बंद होती जा रही हैं। बिलासपुर से भोपाल, इंदौर, अंबिकापुर, जगदलपुर और जबलपुर के लिए उड़ानें पहले ही बंद हो चुकी थीं, और अब कोलकाता की फ्लाइट भी दोबारा बहाल होने के ठीक अगले ही दिन फिर से बंद कर दी गई है। कभी कम यात्री मिलने तो कभी तकनीकी व एयरपोर्ट की सुविधाओं में कमी का हवाला देकर एयरलाइन कंपनियों ने सेवाओं से हाथ खींच लिया है।
समय में बदलाव और पहली बंदी – कोलकाता की उड़ान इससे पहले 18 सितंबर 2026 को कम यात्रियों का हवाला देकर बंद की गई थी। इससे पूर्व 12 अगस्त 2026 को सुबह की फ्लाइट का समय बदलकर दोपहर कर दिया गया था, जबकि सुबह की उड़ान में औसतन 45 से 50 यात्री सफर कर रहे थे।
42 यात्रियों की बुकिंग भी पड़ी ठप – बताया जा रहा है कि जिस दिन उड़ान को अचानक बंद किया गया, उस दिन के लिए पहले से ही 42 यात्रियों की एडवांस बुकिंग हो चुकी थी। अचानक सेवा बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और उन्हें अपना सफर रद्द करना पड़ा।
यात्रियों के आंकड़ों में 57 प्रतिशत की बड़ी गिरावट
बिलासपुर एयरपोर्ट से उड़ानों में यात्रियों की घटती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार
दिसंबर 2025 से मार्च 2026 – इस अवधि के दौरान 33 उड़ानों में कुल 1,335 यात्रियों ने बिलासपुर से हवाई यात्रा की थी।
अप्रैल से अगस्त 2026 – वहीं इसके बाद अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच समान 33 उड़ानों में यह संख्या घटकर मात्र 571 यात्री रह गई।
57% की गिरावट – यानी महज कुछ महीनों के भीतर बिलासपुर से हवाई सफर करने वाले यात्रियों की कुल संख्या में लगभग 57 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।
सुविधाओं की कमी और 3C/NVFR नाइट लैंडिंग का अटका काम
क्षेत्रीय हवाई यात्रियों और हवाई सेवा जन संघर्ष समिति का मानना है कि उड़ानों की अनिश्चितता, खराब समय-सारणी और एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग व पूर्ण 3C कैटेगरी सुविधाओं के अभाव के कारण यात्री ट्रेनों या रायपुर एयरपोर्ट का रुख कर रहे हैं। जब तक बिलासपुर एयरपोर्ट को पूर्ण विकसित कर स्थिर समय-सारणी के साथ नियमित उड़ानें संचालित नहीं की जाएंगी, तब तक यात्रियों का भरोसा कायम करना मुश्किल होगा।





