मैं भी मांझी की बेटी हूं। इस संस्कृति से मेरा गहरा नाता है।
मेरे दादा-पिता और भाई मांझी थे, इसलिए मैं इस सामाजिक व्यवस्था और परंपरा को बखूबी समझती हूं। समय के साथ शासन व्यवस्था और कानून बदलते रहे हैं। प्राचीन समय में राजाओं का शासन था, फिर ब्रिटिश काल का दौर आया और अब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू है, लेकिन आदिवासी समाज ने अपनी गौरवशाली परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को आज भी जीवित रखा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने बस्तर दौरे के दौरान शुक्रवार को जगदलपुर के सिरहासार भवन में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में उन्होंने मांझी-चालकियों और जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से सीधी मुलाकात की। उनसे आत्मीय संवाद किया और उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना। मुरिया दरबार को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध आदिवासी परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर की खुले दिल से सराहना की।
आदिवासी परंपरा को जीवित रखने की अपील
राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की इस ऐतिहासिक परंपरा को हमेशा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी खूबसूरती आपसी भाईचारे और मिल-जुलकर समस्याओं का समाधान निकालने में निहित है। गांवों में मांझी और परगना के माध्यम से बैठक आयोजित कर सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज लोग छोटे-छोटे विवादों को लेकर थाना और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाते हैं, जहां मुकदमों के समाधान में काफी लंबा समय लग जाता है और लोगों को बड़ा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की इस ऐतिहासिक परंपरा को हमेशा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी खूबसूरती आपसी भाईचारे और मिल-जुलकर समस्याओं का समाधान निकालने में निहित है। गांवों में मांझी और परगना के माध्यम से बैठक आयोजित कर सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज लोग छोटे-छोटे विवादों को लेकर थाना और कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाते हैं, जहां मुकदमों के समाधान में काफी लंबा समय लग जाता है और लोगों को बड़ा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
‘आपसी सहमति से सुलझायें समाज से जुड़े मामले’
उन्होंने पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए गांव और समाज से जुड़े मामलों को आपसी बातचीत और संवाद के जरिये सुलझाने पर विशेष जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि मुरिया दरबार एक बेहद मजबूत सामाजिक व्यवस्था है और इसकी परंपरा को लगातार बनाए रखना चाहिए। अपनी पहचान, सांस्कृतिक धरोहर, भाईचारे और परंपराओं को सहेजकर रखना पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए गांव और समाज से जुड़े मामलों को आपसी बातचीत और संवाद के जरिये सुलझाने पर विशेष जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि मुरिया दरबार एक बेहद मजबूत सामाजिक व्यवस्था है और इसकी परंपरा को लगातार बनाए रखना चाहिए। अपनी पहचान, सांस्कृतिक धरोहर, भाईचारे और परंपराओं को सहेजकर रखना पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।
सामूहिक प्रयास और शिक्षा पर फोकस
आदिवासी समाज में एकजुटता का संदेश देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समाज के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान मिलकर करना चाहिए। उन्होंने “एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना” का उल्लेख करते हुए सामूहिक प्रयास और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की मूल परंपरा हमेशा सुख, शांति और आनंद के साथ मिल-जुलकर रहने की रही है। गांव की भलाई के लिए लोग एक साथ पूजा-पाठ करते हैं और सभी त्योहार तथा खुशियां भी मिलकर मनाते हैं।
आदिवासी समाज में एकजुटता का संदेश देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समाज के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान मिलकर करना चाहिए। उन्होंने “एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना” का उल्लेख करते हुए सामूहिक प्रयास और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की मूल परंपरा हमेशा सुख, शांति और आनंद के साथ मिल-जुलकर रहने की रही है। गांव की भलाई के लिए लोग एक साथ पूजा-पाठ करते हैं और सभी त्योहार तथा खुशियां भी मिलकर मनाते हैं।
जनजातीय समाज की शिक्षा पर बल
राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समाज से शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाएं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के भरपूर अवसर दें। अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाए रखते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा से जोड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने जनजातीय प्रतिनिधियों से कहा कि मुरिया दरबार को निरंतर बनाए रखें और इसे कभी बंद न होने दें। राष्ट्रपति ने भरोसा दिया कि सरकार आदिवासी समाज के साथ खड़ी है। मुरिया दरबार में शामिल होने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर पहुंचने के तुरंत बाद ऐतिहासिक मां दंतेश्वरी मंदिर गईं। वहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समाज से शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाएं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के भरपूर अवसर दें। अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाए रखते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा से जोड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने जनजातीय प्रतिनिधियों से कहा कि मुरिया दरबार को निरंतर बनाए रखें और इसे कभी बंद न होने दें। राष्ट्रपति ने भरोसा दिया कि सरकार आदिवासी समाज के साथ खड़ी है। मुरिया दरबार में शामिल होने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर पहुंचने के तुरंत बाद ऐतिहासिक मां दंतेश्वरी मंदिर गईं। वहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया।





