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पेंशनर्स ध्यान दें! बिना किसी झंझट के पाएं मेडिकल भत्ता, सरकार ने बदला भुगतान का तरीका

पेंशनर्स के लिए अब मेडिकल भत्ता पाना हुआ आसान. नए नियमों के अनुसार बैंक खुद खाते में पैसे भेजेंगे, बस समय पर लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य होगा.

केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले पेंशनर्स और उनके परिवारों के लिए ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ (FMA) की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है. सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस (CPAO) द्वारा जारी नए निर्देशों के मुताबिक, अब मेडिकल भत्ते के लिए पेंशनर्स को दफ्तरों के चक्कर काटने या बार-बार बिल जमा करने की जरूरत नहीं होगी. सारा काम अब ऑटोमैटिक तरीके से बैंकों के जरिए होगा.

क्या अब पैसे के लिए पेपर जमा नहीं करने होंगे?

जी हां, सरकार ने सबसे बड़ा बदलाव यही किया है कि अब पेंशनर्स को मेडिकल भत्ते के लिए अलग से कोई बिल या कागजात जमा करने की सिरदर्दी नहीं पालनी होगी. जैसे ही CPAO की तरफ से बैंक को ‘स्पेशल सील अथॉरिटी’ (SSA) मिल जाएगी, बैंक खुद-ब-खुद आपके खाते में पैसे क्रेडिट कर देगा. यह भुगतान हर तीन महीने (त्रैमासिक) में एक बार किया जाएगा. भत्ते की राशि वही होगी जो सरकार समय-समय पर तय करेगी.

पैसे लगातार मिलते रहें इसके लिए क्या करना होगा?

नियमों के मुताबिक, इस भत्ते का फायदा बिना रुके मिलता रहे, इसके लिए साल में एक बार ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ (जीवन प्रमाण पत्र) जमा करना अनिवार्य है. हर साल नवंबर के महीने में आप इसे डिजिटल या फिजिकल तरीके से जमा कर सकते हैं. सितंबर से नवंबर तक का पैसा दिसंबर की शुरुआत में तभी रिलीज होगा जब आपका लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट होगा. अगर आप FMA की जगह CGHS (OPD) की सुविधा लेना चाहते हैं, तो आप मौजूदा सरकारी नियमों के तहत स्विच भी कर सकते हैं.

बैंक बदलने या मृत्यु होने पर क्या होगा?

अगर कोई पेंशनर अपना बैंक खाता एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर करता है, तो CPAO की मौजूदा गाइडलाइंस के हिसाब से भत्ता मिलता रहेगा. वहीं, दुर्भाग्यवश पेंशनर की मृत्यु होने की स्थिति में, यदि परिवार के किसी सदस्य का नाम पहले से ही अथॉरिटी लेटर में शामिल है, तो बैंक सिर्फ डेथ सर्टिफिकेट देखकर उन्हें भुगतान शुरू कर देगा. लेकिन अगर नाम शामिल नहीं है, तो संबंधित विभाग से नई अथॉरिटी लेनी होगी.

इस नए सिस्टम से क्या फायदा होगा?

इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य सिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाना है. अब सारा डेटा बैंकों के ‘सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेंटर्स’ (CPPCs) के जरिए मैनेज होगा. इससे न केवल पेंशनर्स का समय बचेगा, बल्कि भुगतान में होने वाली देरी भी खत्म होगी. बैंकों को उनके द्वारा किए गए भुगतान की भरपाई सरकार करेगी. तकनीकी बारीकियों के लिए CPAO और बैंकों के बीच सिस्टम इंटीग्रेशन पर काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में एक भी रुपया अटकने की गुंजाइश न रहे.

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