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बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, चारधाम यात्रा का शुभारंभ

बदरीनाथ धाम के कपाट 24 अप्रैल को खुले, वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. चारधाम यात्रा शुरू, जानें गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का महत्व.

बदरीनाथ धाम के कपाट छह माह बाद गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. सुबह लगभग सवा छह बजे निर्धारित मुहूर्त पर जैसे ही कपाट खुले, पूरा क्षेत्र “जय बदरी विशाल” के जयकारों से गूंज उठा. इस पावन अवसर पर करीब 15 हजार श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.

इस शुभ अवसर पर पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई. वहीं पुष्कर सिंह धामी ने महाभिषेक पूजा कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की. इसके साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है, जिसका इंतजार श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं.

गंगोत्री धाम का महत्व

गंगोत्री धाम मां गंगा के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है. यह मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. इस धाम का दर्शन जीवन में पवित्रता और मोक्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है.

यमुनोत्री धाम की विशेषता

यमुनोत्री धाम मां यमुना को समर्पित है और यह भी उत्तरकाशी जिले में स्थित है. यहां यमुना नदी का उद्गम माना जाता है. श्रद्धालु यहां स्थित गर्म जल कुंडों में प्रसाद पकाकर देवी को अर्पित करते हैं. यह धाम जीवन में शुद्धता, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है.

बदरीनाथ धाम का धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम चारधामों में प्रमुख स्थान रखता है. नर-नारायण पर्वतों के बीच स्थित इस पवित्र स्थल के पास अलकनंदा नदी बहती है. मान्यता है कि यहां छह महीने मनुष्य और छह महीने देवता पूजा करते हैं. यह स्थान मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

केदारनाथ धाम की आस्था

केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह धाम समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां तक पहुंचने के लिए कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो श्रद्धालुओं की आस्था और तप का प्रतीक मानी जाती है.

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