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तिल्दा नेवरा के ग्राम टंडवा में अक्ति पर्व पर गुड्डे-गुड़ियों की शादी धूमधाम से आयोजित की गई। पारंपरिक रस्मों, गड़वा बाजा और बारात ने ग्रामीणों को आकर्षित किया।

 तिल्दा नेवरा। छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा में अक्षय तृतीया यानी अक्ति पर्व के अवसर पर ग्राम पंचायत टंडवा में पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली। दरअसल, गुड्डे-गुड़ियों (पुतरा-पुतरी) की शादी पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ संपन्न कराई गई। इस अनोखे आयोजन ने सभी का मन मोह लिया।

गाजे-बाजे के साथ मनाया गया पर्व 
गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में गुड्डे-गुड़ियों की शादी बिल्कुल वास्तविक विवाह की तरह संपन्न हुई। तेल-माटी, चूल-माटी जैसी पारंपरिक रस्मों के साथ डीजे की धुन पर नाच-गाना हुआ, वहीं बारात का स्वागत गड़वा बाजा के साथ बड़े ही उत्साह से किया गया।

पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न
गोधूलि बेला में विधिवत पानी ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया और पूरे विधि-विधान के साथ यह विवाह संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का आयोजन टंडवा के गौरा चौरा, वार्ड क्रमांक 3 के पास किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण इस अनोखी शादी के साक्षी बने।

ग्रामीणों ने परंपरा की जमकर सराहना की 
इस आयोजन का नेतृत्व वार्ड क्रमांक 3 के हरिश्चंद्र सेन ने किया। पूरे आयोजन को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी वास्तविक दूल्हा-दुल्हन की शादी हो रही हो। ग्रामीणों ने इस पारंपरिक आयोजन की जमकर सराहना की और इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत उदाहरण बताया।

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