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साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन क्यों सबसे शुभ, ऐसे करें पूजा

साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन शुभ होता है. इस दिन शिरडी में भी साईं बाबा की पालकी यात्रा निकाली जाती है. आप गुरुवार के दिन घर या मंदिर जाकर भी साईं बाबा की पूजा कर सकते हैं.

शिरडी के साईं बाबा सम्मानित आध्यात्मिक गुरुओं में एक हैं, जिन्होंने हमेशा प्रेम, करुणा और एकता का विनम्रतापूर्वक उपदेश दिया. उन्होंने हमेशा सभी धर्मों को एक ही स्रोत बताया. साईं के इन्हीं विचार और भावनाओं के कारण देश-दुनिया में विभिन्न धर्मों के लोग उनके अनुयायी बनें और साईं बाबा के कई मंदिर स्थापित किए गए.

साईं सबके आराध्य हैं. शिरडी साईं बाबा का सबसे प्रसिद्ध कथन ‘सबका मालिक एक’ सभी धर्मों के बीच एकता, सद्भावना और प्रेम का संदेश देता है. साईं के इस कथन का अर्थ है- ईश्वर एक है चाहे उसे ईश्वर कहो, अल्लाह कहो या भगवान.

साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन क्यों शुभ

वैसे तो आप प्रतिदिन साईं का पूजन कर सकते हैं. लेकिन विशेषकर साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है. इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि, गुरुवार का संबंध बृहस्पति देव यानी देवताओं के गुरु से है. गुरुवार के दिन को ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है. साईं बाबा को भी आध्यात्मिक गुरु का स्वरूप माना जाता है. क्योंकि उन्होंने लोगों के बीच प्रेम, दया और सेवा भाव का संदेश दिया. इसलिए गुरुवार को उनकी पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है.

गुरुवार को निकलती है साईं बाबा की पालकी

शिरडी में भी हर गुरुवार को साईं बाबा की विशेष पूजा की जाती है और पालकी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं. पालकी यात्रा द्वारकामाई से साईं समाधि मंदिर तक जाती है. इस भव्य शोभायात्रा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और सभी भजनों के साथ बाबा की मूर्ति को फूलों से सजी पालकी में ले जाते हैं. यह पालकी यात्रा साईं बाबा की भक्ति और उनके प्रति प्रेम का प्रतीक है.

कैसे करें साईं बाबा की पूजा (Sai Baba Puja Vidhi)

गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा के लिए सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इस दिन पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें. अगर पर घर पर पूजा कर सकते हैं तो साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. साईं बाबा को पीले फूल चढ़ाएं. आप श्रद्धापूर्वक बाबा को सात्विक खिचड़ी. हलवा, पूरी, मीठी खीर, बेसन के लड्डू, फल आदि का भोग लगा सकता है. इसके बाद साईं बाबा के मंत्र या ‘ॐ साईं राम’ का जाप करें और साईं चालीसा पढ़ें.

शिरडी वाले साईं बाबा (Shirdi Sai Baba)

महाराष्ट्र के परभणी ज़िले के पाथरी गांव को शिरडी के साईं बाबा का जन्मस्थल बताया जाता है. हालांकि इसका कोई प्रमाण न होने के कारण इस पर हमेशा ही लोगों का मतभेद रहा है. लेकिन यहां स्थानीय लोग मानते हैं कि, साईं का जन्म 1838 में इसी स्थान पर हुआ था. साईं बाबा का मूल नाम हरिभाऊ भुसारी था. आज देशभर में साईं बाबा के कई मंदिर है और भक्तों की उनके प्रति गहरी आस्था भी है.

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