एसबीआई रिसर्च ने सुझाव दिया है कि आरबीआई को जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रुपये को सहारा देना चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा का मजबूत रिजर्व है, जो बाजार में दखल के लिए पर्याप्त है. रिपोर्ट में ऑयल कंपनियों की डॉलर मांग को बाजार से अलग करने की भी सलाह दी गई है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है और रुपये में अनावश्यक उतार चढ़ाव को रोका जा सकता है.
पश्चिम एशिया संकट के बीच रुपये में बढ़ती कमजोरी और उतार चढ़ाव को लेकर भारतीय स्टेट बैंक के रिसर्च विंग एसबीआई रिसर्च ने अहम सुझाव दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक को जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रुपये को सहारा देना चाहिए. रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक तनाव के चलते बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय मुद्रा पर भी दिख रहा है. सोमवार को कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया, हालांकि अंत में यह 15 पैसे की बढ़त के साथ 94.70 पर बंद हुआ.
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि भारत के पास इस समय 10 महीने से ज्यादा के आयात को कवर करने लायक विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है. रिपोर्ट के अनुसार 700 अरब डॉलर से ज्यादा का यह रिजर्व इतना मजबूत है कि जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को सपोर्ट दिया जा सकता है और सट्टेबाजी पर लगाम लगाई जा सकती है.



